वर्ष 1907 में पालिका के संशोधित एक्ट में माल रोड में गंदगी, कचरा फैलाने और फूल तोड़ने पर जुर्माना की व्यवस्था की गई। वाहनों की संख्या कम करने के लिए शुल्क का प्राविधान किया गया। वर्ष 1970-72 में माल रोड प्रवेश शुल्क 10 रुपये था।
वर्ष 1988 में 20 रुपये और 2003 को दोनों बैरियरों का शुल्क बढ़ाकर 100 कर दिया गया। इसके बावजूद माल रोड में वाहनों की संख्या कम नहीं हुई। वर्तमान में माल रोड में प्रवेश शुल्क 150 रुपये है और दोपहिया वाहनों का शुल्क सौ रुपये है।
फिलहाल माल रोड अतिक्रमण का शिकार
माल रोड में वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। पिछले दो दशक से राजनीति से जुड़े लोगों ने अपने फायदे के लिए माल रोड पर अतिक्रमण को बढ़ावा दिया। अब अक्सर माल रोड में पर्यटकों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
वरिष्ठ पत्रकार बिजेंद्र सिंह पुंडीर कहते हैं कि देश की कई बड़ी हस्तियों ने माल रोड के लिए नियमों का पालन किया था। नेहरू, महात्मा गांधी, दलाईलामा ने आदि वाहनों की बजाय घोड़ा-रिक्शा की सवारी की।
पार्किंग की समस्या है मुख्य वजह
नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता कहते हैं कि पार्किंग की समस्या के चलते माल रोड पर वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। माल रोड पर अधिकांश होटल हैं और लोगों के घर भी हैं। इसलिए माल रोड पर यातायात बढ़ जाता है।
पालिका की कोशिश रहती है कि माल रोड पर कम से कम वाहन चलें। आने वाले दिनों में माल रोड पर वाहनों के प्रवेश को लेकर सख्त बरती जाएगी। पर्यटक सुकून से माल रोड घूम सकें, इसकी योजना नगर पालिका बनाएगी।