फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mussoorie News : वाहनों के भीड़ से खो रही ‘पहाड़ों की रानी’ में मसूरी माल रोड की रंगत

Tue, 05 Jan 2021 02:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, मसूरी
विज्ञापन
अंग्रेजों ने बनवाई थी मसूरी की माल रोड - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी की विश्व विख्यात माल रोड का इतिहास गौरवशाली रहा है। देश की नामचीन हस्तियों ने माल रोड पर पैदल चलकर कानून का पालन किया और यहां की आबोहवा का आनंद लिया।

विज्ञापन


मसूरी की माल रोड अंग्रेजों ने बनवाई थी। माल रोड का निर्माण एक फुटपाथ तौर पर 1830 के आसपास माना जाता है। रोड पिक्चर पैलेस से लेकर गांधी चौक तक है। उस समय माल रोड कच्चा मार्ग और संकरा हुआ करता था। उस समय माल रोड पर चलने के लिए कायदे कानून (वाहनों का प्रयोग वर्जित) का पालन करना पड़ता था।

ऐसे में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, मदनमोहन मालवीय, पंडित गोविंद वल्लभ पंत, टिहरी के महाराजा प्रताप शाह सहित तमाम दिग्गजों ने नियमों उल्लंघन नहीं किया और पैदल चलकर या घोड़ा रिक्शा की सवारी कर नियमों का पालन किया।
विज्ञापन


वर्ष 1920 से लेकर साठ के दशक तक गांधी परिवार के लोग मसूरी में लगातार घूमने आते थे। वर्ष 1959 में दलाईलामा भी मसूरी आये थे। उन्होंने भी माल रोड पर पैदल चलकर यहां की खूबसूरती का नजारा देखा।

Trending Videos
विज्ञापन

गंदगी, कचरा फैलाने और फूल तोड़ने पर था जुर्माना

वर्ष 1907 में पालिका के संशोधित एक्ट में माल रोड में गंदगी, कचरा फैलाने और फूल तोड़ने पर जुर्माना की व्यवस्था की गई। वाहनों की संख्या कम करने के लिए शुल्क का प्राविधान किया गया। वर्ष 1970-72 में माल रोड प्रवेश शुल्क 10 रुपये था।

वर्ष 1988 में 20 रुपये और 2003 को दोनों बैरियरों का शुल्क बढ़ाकर 100 कर दिया गया। इसके बावजूद माल रोड में वाहनों की संख्या कम नहीं हुई। वर्तमान में माल रोड में प्रवेश शुल्क 150 रुपये है और दोपहिया वाहनों का शुल्क सौ रुपये है।

फिलहाल माल रोड अतिक्रमण का शिकार

माल रोड में वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। पिछले दो दशक से राजनीति से जुड़े लोगों ने अपने फायदे के लिए माल रोड पर अतिक्रमण को बढ़ावा दिया। अब अक्सर माल रोड में पर्यटकों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।

वरिष्ठ पत्रकार बिजेंद्र सिंह पुंडीर कहते हैं कि देश की कई बड़ी हस्तियों ने माल रोड के लिए नियमों का पालन किया था। नेहरू, महात्मा गांधी, दलाईलामा ने आदि वाहनों की बजाय घोड़ा-रिक्शा की सवारी की।

पार्किंग की समस्या है मुख्य वजह

नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता कहते हैं कि पार्किंग की समस्या के चलते माल रोड पर वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। माल रोड पर अधिकांश होटल हैं और लोगों के घर भी हैं। इसलिए माल रोड पर यातायात बढ़ जाता है।

पालिका की कोशिश रहती है कि माल रोड पर कम से कम वाहन चलें। आने वाले दिनों में माल रोड पर वाहनों के प्रवेश को लेकर सख्त बरती जाएगी। पर्यटक सुकून से माल रोड घूम सकें, इसकी योजना नगर पालिका बनाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें