नरेंद्र मोदी की रैली में वैसे तो शंखनाद लोकसभा चुनाव के लिए था लेकिन इसकी प्रतिध्वनि ने महानगर भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को उलट-पुलट दिया है। रैली से महानगर भाजपा अध्यक्ष नीलम सहगल को आक्सीजन मिल गई है। प्रकोष्ठों और मोर्चों के गठन के संबंध में उपजे विवाद में महानगर अध्यक्ष लोकल दिग्गजों के निशाने पर आ गई थीं।
कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
भाजयुमो और महिला मोर्चा की महानगर इकाई की घोषणा के बाद महानगर अध्यक्ष नीलम सहगल एक पूर्व मुख्यमंत्री और शहर के दिग्गज नेताओं के निशाने पर आ गई थीं। हालत यहां तक पहुंची थी कि सहगल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने तक के लिए कहा था।
दिग्गजों के विरोध के कारण उनकी पसंद ऊषा लखेड़ा महिला मोर्चा की अध्यक्ष नहीं बन सकीं। कंचन ठाकुर को अध्यक्षी मिल गई। भाजयुमो का मामला ठंडे बस्ते में रहा। रैली की तैयारी के दौरान भी विवाद पैदा होते रहे। कैंट से शुरू होने वाली रैली को महानगर अध्यक्ष की जिद के कारण महानगर कार्यालय से किया गया। रैली के बाद सहगल से नाखुश नेता सबक सिखाना चाहते थे, लेकिन रैली से उन्हें आक्सीजन मिल गई है।
बीस हजार का रखा था लक्ष्य
महानगर इकाई को 20 हजार भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। बाद में यह संख्या 60 हजार करने के लिए कहा गया। महानगर अध्यक्ष का दावा है कि उन्होंने लक्ष्य पूरा कर लिया। इसके अलावा जहां एक पूर्व मुख्यमंत्री नीलम से नाखुश रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने सहगल के सिर पर हाथ रख दिया। निशंक ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और नरेंद्र मोदी से महानगर अध्यक्ष का परिचय कराकर तारीफ की।
इसके अलावा गुजरात से आईं अहमदाबाद की मेयर और प्रदेश सचिव ने हाई कमान को पत्र लिखे हैं। पत्र में महानगर अध्यक्ष सहगल की तारीफ की गई और उनके कार्य से संतुष्टि जताई गई।