तमाम दबावों के बावजूद पैसिफिक हिल्स मामले से लेकर अवैध कब्जों के खिलाफ खुलकर ‘बैटिंग’ करने वाले मुख्य नगर अधिकारी (एमएनए) हरक सिंह रावत शनिवार को ‘बोल्ड’ हो गए।
मंत्री के इशारे पर न चलने की गाज गिरी
रावत का सीधा आरोप है कि उन पर भूमाफिया को संरक्षण देने वाले एक मंत्री के इशारे पर न चलने की गाज गिरी है। रावत का तबादला बतौर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) नैनीताल किया गया है। एसडीएम मसूरी नितिन सिंह भदौरिया को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
पीसीएस हरक सिंह रावत की यह दूसरी पारी थी। उनकी पहली बारी भी चर्चित और विवादित रही। जुलाई 2014 में दूसरी बार एमएनए बने तो उनके कई काम पार्षदों को खटकने लगे। कांग्रेसी पार्षदों से विवाद भी उनके जाने का कारण बताया जा रहा है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष नीनू सहगल ने मुख्यमंत्री से उनकी शिकायत की थी और उनका ट्रांसफर होने तक निगम में कदम नहीं रखने का ऐलान कर दिया था।
पद से हटाए जाने के फौरन बाद हरक सिंह रावत ने कई आरोप खुलकर लगाए। उनका कहना है कि एक मंत्री ने एक बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करने पर मुझ पर गुस्सा उतारा था। फिर भी निगम ने अपनी जमीन वापस लेकर छोड़ी। निगम की जमीन पर हो रहे तमाम कब्जों के लिए यही मंत्री सबसे अधिक जिम्मेदार है।
इन्हीं के लोग जमीन कब्जाने के गोरखधंधे में लगे हैं। अब मैं अवैध कब्जाधारियों के नाम खोलूंगा। मंत्री का भी नाम होगा और पार्षदों का भी। यह रिपोर्ट मैं मुख्यमंत्री को सौंपूंगा, ताकि यह लोग भविष्य में चुनाव न लड़ सकें। नगर निगम में पार्षद कम और भूमाफिया ज्यादा बैठे हैं।
मेरे जाने की पटकथा उसी दिन लिखी जा चुकी थी, जिस दिन मैंने लालपुल पर एक पार्षद का अवैध कब्जा हटाया था। नेता प्रतिपक्ष समेत कई कांग्रेसी पार्षदों ने मुझ पर दबाव बनाया, लेकिन मैंने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
कुछ ने डील करनी चाही। जो पार्षद यहां पर सबसे ज्यादा व्यवस्था का विरोध करते हैं, असल में वही बाद में ब्लैकमैलिंग करते हैं। सभी को एक मंत्री का संरक्षण प्राप्त है।