एक तरफ तो स्वास्थ्य मंत्री प्रदेश में दवा संकट नहीं होने का दावा कर रहे हैं, वहीं विभागीय अधिकारी गोलमोल जवाब देकर गर्दन बचाने की कोशिशों में लगे हैं। लेकिन दवा नहीं मिलने की वजह से अस्पतालों में मरीज परेशान हैं।
दून अस्पताल का स्टॉक रजिस्टर मंत्री के दावों की पोल खोल रहा है। रजिस्टर के अनुसार करीब 25 दवाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। परेशान घूम रहे मरीज भी मंत्री से पूछ रहे हैं कि अगर दवा है तो दी क्यों नहीं जा रही है?
अमर उजाला में दवा संकट की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद से ही विभागीय मंत्री से लेकर संबंधित अधिकारी तक मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि प्रमुख सचिव और स्वास्थ्य महानिदेशक ने माना हैं कि किसी भी जिले में सीएमओ के स्तर से दवाओं की खरीद नहीं हुई है। कई दवाओं का स्टॉक खत्म है। बड़ी संख्या में दवाएं खत्म होने के कगार पर हैं। मामले में दोषी सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी तक दी जा रही है।
डिस्पेंसरी में दो दर्जन दवाएं पूरी तरह खत्म
शुक्रवार को परेड मैदान में आरोग्य स्वास्थ्य मेले में पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने एक बार फिर दवाओं का संकट नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं हैं। लेकिन ठीक उसी समय प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल दून की डिस्पेंसरी में 100 में से करीब दो दर्जन दवाएं पूरी तरह खत्म थीं।
दवाओं की भेजी डिमांड
दून अस्पताल ने करीब ढाई दर्जन अलग-अलग दवाओं की डिमांड भेजी है। इनमें से ज्यादातर दवाएं अस्पताल में खत्म हो चुकी हैं। कुछ अन्य दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। हालांकि पहले खुले तौर पर दवा संकट की बात मान रहे अधिकारी अब वैकल्पिक दवा होने की बात कह रहे हैं। उनका तर्क है कि जो दवाएं खत्म हुई हैं, उनकी वैकल्पिक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं।
आठ को मिलेगा आईबी फ्लूड
आईबी फ्लूड की कमी झेल रहे अस्पतालों को दो दिन और परेशानी झेलनी पड़ेगी। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल ने बताया कि सात फरवरी को टेंडर खुलने के बाद आठ से आपूर्ति की जाएगी। अन्य दवाएं भी अस्पतालों को भेजी गई है।
पछवादून के अस्पतालों में फिलहाल हैं दवाएं
पछवादून के अस्पतालों में फिलहाल पर्याप्त मात्रा में दवाओं का स्टॉक है। लेकिन जल्द ही दवाओं के क्रय पर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो संकट पैदा हो सकता है। सीएचसी विकासनगर पछवादून के साथ ही जौनसार बावर, उत्तरकाशी, टिहरी और हिमाचल के कई गांवों का केंद्र बिंदु है। यहां रोजाना 800 से 900 तक ओपीडी होती है। इस वजह से दवाइयों की खपत ज्यादा है।
लेकिन हो सकता है संकट
अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाओं का स्टॉक है। अगले कुछ दिन तक प्रबंधन मरीजों को बिना किसी दिक्कत के दवाएं उपलब्ध करा सकता है, लेकिन जल्द ही शासन स्तर पर मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो दवाओं का संकट खड़ा हो सकता है।
- डॉ. विनोद कुमार, चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी, विकासनगर