उत्तराखंड में निजी हाथों के जरिए खनन के खजाने पर कुंडली मार कर बैठने का खेल शुरू हो चुका है।
सियासी जमात भी जुटी
माफियाओं को इस कारोबार की कुंजी थमाने की मुहिम में शासन-सत्ता से लेकर सियासी जमात भी जुट गई है। इतना ही नहीं विकासनगर में पट्टों के आवंटन से अब इस खेल में गैंगवार की आहट भी सुनाई देने लगी है।
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सूत्रों की मानें तो एक नौकरशाह के इशारे पर पूरे प्रदेश में खनन का खेल किया जा रहा है। राज्य के रिजर्व फारेस्ट से गुजरने वाली 35 नदियों से प्राकृतिक संपदा की निकासी निजी हाथों से कराने की तैयारी चल रही है।
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इसका तानाबाना भी बुना जा चुका है। काफी हद तक यह नौकरशाह अपने इस मकसद में कामयाब भी हो चुका है। इसी का नतीजा है कि विकासनगर क्षेत्र में ताबड़तोड़ पांच बाहरी लोगों को खनन के पट्टे थमा दिए गए।
अब खबरें आ रही हैं कि जिन निजी हाथों को खनन के पट्टे दिए गए हैं वहां बड़ा खेल चल रहा है। मसलन पट्टा कहीं है और खनन कहीं हो रहा है। इससे सरकार को भारी चपत लग रही है।
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सूत्रों का कहना है कि सरकार का यही रवैया रहा तो आने वाले दिनों में उत्तराखंड में खनन के खेल में गोलियों की तड़तड़ाहट भी गूंजेगी। इसके लिए सीधे तौर पर शासन ही जिम्मेदार होगा।
वन्यजीवों के लिए भी खतरा
निजी हाथों से खनन कराने में सबसे अधिक नुकसान वन्यजीवों के वास स्थल को होगा। वैज्ञानिक तरीके से खनन न होने पर वन्यजीवों का वास स्थल तो प्रभावित होगा ही, इसकी आड़ में शिकार की घटनाएं भी बढ़ जाएंगी।
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विकासनगर, हरिद्वार मामलों से भी अगर सरकार नहीं चेता तो आने वाले दिनों
में हालात बेकाबू हो जाएंगे। उत्तराखंड पूरी तरह खोखला हो जाएगा, जिसकी
सारी जिम्मेदारी कांग्रेस सरकार की होगी।
- संतोष रावत, अध्यक्ष उत्तराखंड वन विकास निगम