अलकनंदा नदी से मछलियों के पेट के नमूने लिए
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शोध के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. जसपाल सिंह चौहान और शोध छात्रा नेहा व वैशाली की टीम ने श्रीनगर में अलकनंदा नदी से मछलियों के पेट के नमूने लिए। इसमें चौंकाने वाला तथ्य यह रहा है कि सभी मछलियों के भोजन के साथ माइक्रोप्लास्टिक, पॉलीमर, फाइबर और फॉम के अवशेष मिले।
डॉ. चौहान ने बताया कि पॉलीथिन-प्लास्टिक खत्म नहीं होता है। बल्कि यह छोटे-छोटे कणों में टूट जाता है। माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं। नदी के पानी के साथ यह मछलियों के शरीर में प्रवेश करते हैं या कभी मछलियों के आहार के जरिए यह उनके शरीर में पहुंच रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि लैब में जब यह पुष्ट हो गया कि मछलियों के पेट में माइक्रोप्लास्टिक और अन्य सामग्री जा रही है, तो विश्लेषण के लिए आईआईटी रुड़की की लैब नमूने भेजे गए। वहां भी पॉलीमर-माइक्रोप्लास्टिक की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि मनुष्य के मछलियों के खाने पर इन तत्वों के मानव शरीर में जाने की संभावना है। यह मछलियों की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।