प्रदेश के करीब 53 हजार केंद्रीय पेंशनरों को अधिकृत केमिस्ट से इंटेंडेड दवाईयों की आपूर्ति बंद हो गई है। इससे नाराज पेंशनरों ने शुक्रवार को अपर निदेशक सीजीएचएस का घेराव करने के साथ ही प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, सांसद को ज्ञापन भेजा और तत्काल पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की।
केंद्रीय सेवाओं से सेवानिवृत्त करीब 53 हजार केंद्रीय पेंशनरों को सीजीएचएस के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। उन्हें जरूरत पड़ने पर इंटेंडेड दवाईयां सीजीएचएस के अधिकृत केमिस्ट से मिलती हैं। हाल ही में महानिदेशालय ने इन दवाईयों की आपूर्ति प्रतिबंधित कर दी।
पेंशनरों का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से गंभीर रोगियों (बुजुर्गों) को लिखी जा रही इन दवाइयों की आपूर्ति क्रमबद्ध रूप से अधिकृत केमिस्ट कानूनी प्रक्रिया (टेंडर) के तहत करते हैं। जो दूसरे दिन संबधित वेलनेस सेंटर में मरीजों को कैशलेस रूप में मिलती हैं। सीजीएचएस स्टोर में उपलब्ध बाकी दवाइयां उसी दिन संबधित मरीजों को दी जाती हैं।
दून केंद्रीय पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस नेगी और महासचिव एसएस चौहान ने कहा कि बिना किसी नोटिस या कारण बताए इस सुविधा को बंद करने से सैकड़ों बुजुर्ग पेंशनर मरीजों के लिए परेशानी पैदा हो गई है। इतनी उम्र में बीमार पेंशनर कैसे बाजार से दवाई खरीदेंगे और उसका बिल जमा कराकर प्रतिपूर्ति लेंगे। इससे नाराज दून केंद्रीय पेंशनर्स एसोसिएशन ने दो बार सीजीएचएस इंचार्ज (अपर निदेशक) डॉ. जानकी जंगपांगी का घेराव किया।
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उन्होंने कहा कि यह तानाशाही रवैया नहीं चलेगा। निर्णय लिया गया कि अगर एक सप्ताह के भीतर यह आदेश वापस न लिया गया तो वह उग्र आंदोलन शुरू कर देंगे। इसके साथ ही एसोसिएशन की ओर से मामले में प्रधान मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, सांसद अनिल बलूनी व नरेश बंसल, महानिदेशक सीजीएचएस और पेंशन व पेंशनर्स कल्याण मंत्रीको ज्ञापन भेजे गए। घेराव, बैठक में अध्यक्ष बीएस नेगी, महासचिव एसएस चौहान, संरक्षक एनएन बलूनी, उपाध्यक्ष आरडी सेमवाल, सचिव एचएस काला, कोषाध्यक्ष अशोक शंकर, ऑडिटर सुशील जोशी आदि मौजूद रहे।