मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो आसमान छू रहे फ्लैटों के दाम जमीन पर आ जाएंगे।
एमडीडीए ने आवासीय इमारतों की ऊंचाई 21 से बढ़ाकर 30 मीटर करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। प्रस्ताव मंजूर हुआ तो किसी भी हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैटों की संख्या बढ़ेगी, जिससे कीमतों का घटना लाजमी है।
मौजूदा नियम के कारण फिलहाल किसी भी प्रोजेक्ट में अधिकतम चार-पांच फ्लोर ही बन पाते हैं। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया शासन को यह प्रस्ताव भेज दिया गया है।
कई तोड़ रहे नियम
आवासीय इमारतों के लिए भले ही 21 मीटर ऊंचाई का नियम तय है, लेकिन शहर में इस नियम का खुला उल्लंघन हो रहा है। इसमें ज्यादातर व्यवसायिक इमारतें शामिल हैं। ऊपरी दबाव के बाद एमडीडीए इनके खिलाफ चाहकर भी कार्रवाई नहीं कर पाता।
घर के सपने की कालाबाजारी
बेसिक सर्विस अर्बन प्रोजेक्ट (बीएसयूपी) के तहत मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए बने फ्लैटों पर कालाबाजारियों की नजर पड़ र्गई है। धोखेबाज गरीब लोगों को 50 हजार रुपए में फ्लैट दिलाने का झांसा दे रहे हैं। इस बाबत शिकायत मिलते ही मेयर विनोद चमोली ने जांच का आदेश दे दिया है।
शनिवार दोपहर ब्रह्मपुरी के कुछ लोग मेयर से मुलाकात करने पहुंचे। ये लोग मेयर से बीएसयूपी फ्लैट पर कब्जा लेने की जानकारी लेने आए थे। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें 50 हजार रुपए में फ्लैट दिलाने की बात कही है। बताया है कि रकम उन्हें देकर कब्जा नगर निगम से मिलेगा। मेयर यह बात सुन चौंक गए।
उन्होंने संबंधित लोगों को किसी को भी रकम न देने की नसीहत दी। मेयर ने कहा कि कोई ऐसा प्रलोभन दे तो यह ठगी है। उन्होंने लोगों से ऐसे ठगों के नाम, मोबाइल नंबर लेकर निगम को देने के लिए कहा।
मेयर ने यह भी कहा कि जब भी फ्लैट आवंटन शुरू होगा, सरकार और नगर निगम इसकी सार्वजनिक सूचना देंगे। मेयर ने मामले की जांच का आदेश अधिकारियों को दिया। उधर, क्षेत्रीय पार्षद सतीश कश्यप ने बताया कि उनके पास भी ऐसी शिकायत आई है। उन्होंने अपने स्तर से जांच शुरू की है। कहा कि पुलिस को भी इसकी जानकारी देंगे।
बीएसयूपी का कोई भी फ्लैट सीधे बेचा नहीं जाना है। इन फ्लैटों का आवंटन सर्वे के आधार पर मलिन बस्ती में रहने वाले लोगों को ही किया जाना है। अगर कोई इन्हें बेचने की बात लोगों से कहता है तो समझ लें कि वह ठग है। लोग ऐसे धोखेबाजों से बचें, गाढ़ी कमाई उन्हें कतई न दें। र्कोई ऐसा भरोसा दिलाए तो निगम को तुरंत बताएं।
- विनोद चमोली, मेयर
नदियों में बसाने का भी धंधा
राजधानी में नदियों के किनारे बस्तियां बसाने वाला ठग गिरोह भी सक्रिय है। निगम को अकसर ऐसी शिकायतें मिलती हैं, लेकिन मामला हर बार रफा-दफा कर दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि इस खेल में कई सफेदपोश भी शामिल हैं।
जल्द बनाएं बीएसयूपी फ्लैट
उत्तराखंड मलिन बस्ती सुधार समिति के अध्यक्ष राजकुमार ने शनिवार को काठबंगला में निर्माणाधीन बीएसयूपी फ्लैटों का निरीक्षण किया। बताया कि साढ़े सात करोड़ की लागत से जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत 148 भवन बन रहे हैं। उन्होंने काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
अधिकारियों को पानी, बिजली, सीवर लाइन आदि से इन फ्लैटों को जोड़ने के लिए भी कहा गया। मुख्य नगर अधिकारी नितिन कुमार भदौरिया, अपर मुख्य नगर अधिकारी हर्षवर्धन मिश्रा, अधिशासी अभियंता बीपी बधानी, एके सुंदरियाल आदि मौजूद रहे।
घर बैठे जमा नहीं हो रहा गृहकर
घर बैठे गृहकर (हाउस टैक्स) जमा कराने की सुविधा फिलहाल ठप पड़ी है। निगम में ऑनलाइन गृहकर सेवा दे रही कंपनी गायब है। ऑनलाइन सेवा बंद होने से भवन स्वामियों को गृहकर जमा करने के लिए निगम दफ्तर की दौड़ लगानी पड़ रही है। हालांकि निगम प्रशासन अब नई कंपनी को काम सौंपने की तैयारी में है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें कितना वक्त लगेगा।
भवन स्वामियों को ऑनलाइन हाउस टैक्स जमा करने की सुविधा नगर निगम ने पिछले साल शुरू की थी। इसे शहरवासियों ने हाथोंहाथ लिया। बड़ी संख्या में भवन स्वामी ऑनलाइन गृहकर जमा करा रहे थे। कुछ दिनों पहले बरेली की एक कंपनी को काम सौंपा गया, लेकिन इसके कर्मी अब गायब हैं।
निगम अधिकारियों को तब इसका पता चला जब लोगों ने ऑनलाइन गृहकर जमा नहीं होने की शिकायत की। मामला सामने आने पर अधिकारियों ने कर अनुभाग के साथ बैठक की। अब नई कंपनी की तलाश की जा रही है। जो कंपनी निगम की जमीनों का सर्वे कर रही है, उसे यह काम देने पर विचार किया जा रहा है।
जबकि कर्मचारियों का तर्क है कि ऑनलाइन का काम भी निगम को खुद करना चाहिए। बहरहाल, पिछले कई दिनों से बंद पड़ी ये सेवा कब दोबारा शुरू हो पाएगी, इसका जवाब अधिकारियों के पास नहीं है। मेयर विनोद चमोली ने बताया कि जल्द ही काम किसी नई कंपनी को सौंपा जाएगा।