उत्तराखंड के मलेथा में स्टोन क्रशर के विरोध में चल रहा आंदोलन सफलता के करीब है। अनशनकारी समीर रतूड़ी का दावा है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फोन पर चार स्टोन क्रशरों को निरस्त करने और एक क्रशर की जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि बुधवार को इस बारे में शासनादेश जारी होने पर आमरण अनशन समाप्त किया जाएगा।
मलेथा और इससे सटे चौपड़ियों गांव में पांच स्टोन क्रशर स्वीकृत करने के विरोध में 30 जनवरी को आमरण अनशन पर बैठी सीता देवी को प्रशासन की ओर से अस्पताल में भर्ती कराने के बाद हिमालय बचाओ आंदोलन के समीर रतूड़ी अनशन पर बैठ गए थे।
मंगलवार को मुख्यमंत्री की ओर से भेजी गई अनौपचारिक टीम के सदस्य राजीव नयन बहुगुणा, विनोद नौटियाल और चंद्रमोहन जदली ने कीर्तिनगर के एसडीएम की मौजूदगी में आंदोलनकारियों के साथ क्रशर के संबंध में चर्चा की।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गलत रिपोर्ट के आधार पर एनओसी दी है। तहसील प्रशासन भी जानकारी छिपा रहा है। मौके से राजीव नयन बहुगुणा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से मोबाइल पर अनशनकारी रतूड़ी की वार्ता कराई।
टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण
रतूड़ी ने सीएम से चार स्टोन क्रशरों की अनुमति निरस्त करने की मांग की। जबकि एक क्रशर सत्यम शिवम सुंदरम (कोर्ट में मामला होने से) की जांच और रिपोर्ट आने तक क्रशर संचालन पर रोक लगाने की मांग की। रतूड़ी का दावा है कि सीएम ने सभी मांगों पर हामी भरी है। बुधवार तक सीएम ने आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है। जीओ की प्रति मिलने के बाद अनशन खत्म किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की ओर से भेजी गई अनौपचारिक टीम ने मलेथा और चौपड़ियों में संचालित/स्वीकृत पांच स्टोन क्रशरों का निरीक्षण किया। टीम ने माना कि कृषि के लिए प्रसिद्ध और वीर भड़ माधो सिंह की कर्मस्थली मलेथा गांव में स्टोन क्रशर की स्थापना गलत है। पत्रकार वार्ता में टीम के सदस्यों राजीव नयन बहुगुणा और विनोद नौटियाल ने बताया कि सीएम ने निर्देश दिए थे कि आंदोलनकारियों से वार्ता की जाए।
आंदोलनकारियों से हुई वार्ता, एसडीएम की रिपोर्ट और स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट मंगलवार शाम तक सीएम को सौंपी जाएगी। बताया कि सीएम की भी स्पष्ट धारणा है कि मलेथा में स्टोन क्रशर न चले। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी आंदोलनकारियों के साथ हैं। हिमालय बचाओ आंदोलन से जुडे़ होने के सवाल पर बहुगुणा ने कहा कि यह अनौपचारिक टीम है। समीर रतूड़ी ने बताया कि सीएम ने वार्ता के लिए नौ फरवरी को बुलाया है।
अनशनकारी भी रहे साथ-साथ
पांच दिनों से अनशन कर रहे समीर रतूड़ी टीम के साथ पांचों स्टोन क्रशर में गए। जहां उन्होंने टीम के समक्ष क्रशर संचालकों की ओर से मानकों का उल्लंघन करने के प्रमाण दिखाए। उन्होंने बताया कि क्रशरों में ना तो दीवार लगाई गई है और ना हरित पट्टी की व्यवस्था की गई है।
इसके मायने क्या हैं
मुख्यमंत्री की ओर से भेजी गई टीम के सदस्य राजीव नयन बहुगुणा ने बताया कि मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अवगत कराया कि क्रशर की स्वीकृति उनके कार्यकाल में नहीं मिली है। इस पर जो कुछ पहले हुआ, वह उसमें नहीं जाना चाहते हैं।
अन्य के बारे में चुप्पी
हिमालय बचाओ आंदोलन की ओर से कीर्तिनगर विकास खंड में स्वीकृत/संचालित अन्य क्रशरों की जांच और निरस्तीकरण की भी मांग की जा रही थी, लेकिन मंगलवार को हुई वार्ता में अन्य क्रशरों पर चर्चा नहीं हुई।