महाशिवरात्रि पर उत्तराखंड में आस्था का सैलाब उमड़ा। भोलेनाथ के दर्शन के लिए सुबह से मंदिरों में भीड़ लगी रही। मंदिरों को भी भव्य रूप दिया गया। प्रदेश में कुछ जिलों में शिवरात्रि का उल्लास सबसे अलग ढंग से मनाया जाता है। यहां शिवरात्रि विशेष मानी जाती है।
उत्तरकाशी जिले में रवांई घाटी के ग्रामसभा कुथनौर में श्री जगरनाथ शिव स्वरूप कैलूमानसीर के सानिध्य में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। साल भर में एक बार महाशिवरात्रि के दिन मानसीर महाराज अपने गर्भ गुफा से बाहर आते हैं। अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। तत्पश्चात भगवान मानसीर महाराज की उत्पत्ति का वर्णन, रात्रि जागरण और भोलेनाथ की गाथा सुनाई जाती है।
कावंड़ियों ने विभिन्न मंदिरों के शिवालयों में किया जलाभिषेक
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिवालयों में पहुंचकर शिवलिंग की पूजा की और जलाभिषेक कर परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंगलवार सुबह चार बजे से हरिद्वार से जल लेकर पहुंचे कावंड़ियों ने विभिन्न मंदिरों के शिवालयों में जलाभिषेक किया।
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कोटद्वार के सिद्धपीठ श्री सिद्धबली मंदिर, सिद्धपीठ सुखरौ देवी मंदिर, फलाहारीबाबा मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, बालाजी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गीता भवन मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। वहीं यमकेश्वर के महाबगढ़ मंदिर में भी लोगों की भीड़ लगी रही।