महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में पुलिस हिरासत में लिए गए उनके शिष्य संत आनंद गिरि इस घटना को बड़ी साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य के बीच कोई विवाद नहीं था। पहले जो विवाद हुआ था वह भी दूर हो गया था। सारे मतभेद दूर हो गए थे। उनको मारके मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच हो, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। गुरु जी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं।
हिरासत में लिए जाने के बाद आनंद गिरि ने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रयागराज में मठ और मंदिर का पैसा अपने घरों तक पहुंचा रहे थे। उनकी दो हजार की आमदनी भी नहीं थी, उनके पांच से दस करोड़ के मकान बन गए हैं। उन लोगों ने गुरु जी को ब्लैकमेल कर पैसा कमाया। साजिश के तहत उनकी हत्या हुई है। उनकी हत्या में मेरे नाम का आना बड़ा षड्यंत्र है। इसमें पुलिस के बड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं। कुछ लड़के भी शामिल हो सकते हैं। आनंद गिरि ने कहा कि सुसाइड नोट के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने जीवन में कभी लेटर नहीं लिखा। वे जो करते थे, स्वयं करते थे और सीधा करते थे।
अब उन्होंने लेटर लिखा है तो हैंडराइटिंग की भी जांच होनी चाहिए। गुरु जी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। उनकी हत्या हुई है। जो लोग भी इसके पीछे हैं, उनका बाहर आना जरूरी है। उन्होंने कुछ लोगों के नाम भी सार्वजनिक किए। कहा कि गुरु जी से लगातार पैसे मांग रहे थे। जब मैंने मना किया तो उनको अच्छा नहीं लगा। बार-बार पैसे की डिमांड पूरी न करने के कारण गुरु जी ने आत्महत्या की हो, ऐसा भी हो सकता है। आनंद गिरि ने कहा कि उन्होंने सारा समय मठ और मंदिर की प्रतिष्ठा बनाने में बिताया। कभी एक रुपये का लाभ नहीं लिया। केवल मठ को बचाने का प्रयास किया। वह प्रयास आज इस रूप में आ गया, इसका खेद है।
चार दिन पहले ही मुझे श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का फोन आया था। हरिद्वार आने की बात कह रहे थे। किसी तरह से परेशान नहीं थे। अब अचानक क्या हो गया, किसने किया, कुछ नहीं पता। आनंद गिरि के विषय में फिलहाल अभी कोई बात नहीं करना चाहता हूं। इसकी जांच होनी चाहिए। जिसने भी षड्यंत्र किया है उसका खुलासा होना जरूरी है।
-श्रीमहंत रविंद्र पुरी, सचिव, श्री निरंजनी अखाड़ा
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का असमय जाना संत समाज एवं अखाड़ा परिषद के लिए अपूरणीय क्षति है। संत समाज को संगठित करने के लिए उन्होंने बड़ा कार्य किया। अध्यात्म प्रेमियों के लिए बहुत बड़ी क्षति है।
-महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतन आनंद
श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज उच्च कोटि के संत थे। वह संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर विराजमान थे। उनके आकस्मिक निधन से संत समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।
-श्रीमहंत रवींद्र पुरी, सचिव निरंजनी अखाड़ा
श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज का अचानक निधन पूरे संत समाज को स्तब्ध करने वाला है। इस घटना पर कोई भी यकीन नहीं कर सकता है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज निर्भीक और उदारवादी संत थे, जिनका असमय चले जाना बेहद दुखद है।
-श्रीमहंत राम रतन गिरि
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के नेतृत्व में कुंभ मेले सकुशल संपन्न हुए। उनका कुशल व्यवहार सभी को ज्ञात है। उनके अचानक निधन से संपूर्ण संत समाज शोकाकुल है। भगवान उनको अपने श्री चरणों में स्थान दे।
-श्रीमहंत राजेंद्र दास, अध्यक्ष अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़ा
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के आकस्मिक गोलोक गमन पर दु:खद है। सनातन धर्म की अपूरणीय क्षति है। साथ ही जिन संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है, उन कारणों की गहन जांच होनी चाहिए।
-आचार्य बिपिन जोशी, आध्यात्मिक गुरु
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने का दुखद समाचार मिला। वह श्री गंगा जी में अगाध श्रद्धा रखते थे। कुंभ आयोजन में उनसे कई बार मुलाकात हुई। श्री गंगा सभा की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मां गंगा उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें।
-तन्मय वशिष्ठ, महामंत्री श्री गंगा सभा
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिररि का इस तरह चला जाना संत समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है। संत समाज उनकी खाली हुई जगह की कभी भरपाई नहीं कर पाएगा।
-रवि सिंह शास्त्री, महामंत्री युवा भारत साधु समाज