द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट विधि-विधान के बीच रविवार 11.15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं।
छह माह तक दर्शनार्थियों के लिए अब भगवान मद्महेश्वर की पूजा ऊखीमठ में होगी। मद्महेश्वर में भगवान शिव के नाभि की पूजा होती है। रविवार को प्रात: 6 बजे द्वितीय पड़ाव गौंडार में धाम के प्रधान पुजारी बागेश लिंग ने कपूर आरती के साथ भगवान की चल उत्सव विग्रह डोली की अभिषेक पूजा की।
इसके बाद गांव से धाम के लिए प्रस्थान करते हुए डोली वणसोली, खटरा, नानू, मैखंबा पूनचटट्टी होते प्रात: पौने ग्यारह बजे देव दर्शनी पहुंची। यहां पर अल्प विश्राम कर, परंपराओं के तहत डोली मंदिर से बुलावे का इंतजार किया। इसके तहत मंदिर में पहले से मौजूद थौर भंडारी मदन सिंह और विक्रम सिंह शंखध्वनि के साथ देवदर्शनी पहुंचे और डोली की अगुवाईं की।
वे स्वागत के साथ डोली को मंदिर तक लाए। यहां मंदिर चौक में रखे अपने ताम्र पात्रों का निरीक्षण कर डोली ने मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद पुजारियों व ब्राह्मणों ने धाम में हवन किया और प्रधान पुजारी ने भगवान मद्महेश्वर की डोली में रखी मूर्तियों को गर्भगृह में विराजमान किया।
शुभ लग्न पर वैदिक मंत्रोच्चार व पूजा-आरती के बीच शुभ लग्न व समय पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने पर करीब दो सौ शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया। इस मौके पर डोली प्रभारी बचन सिंह रावत, आलम सिंह, बबलू जंगली, जितेंद्र राणा, कलम सिंह, संजय सिंह आदि मौजूद थे।