बाघंबर वस्त्रों से लिपटी भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली रविवार को सगर गांव से अपने रुद्रनाथ धाम के लिए रवाना हो गई।
दोपहर बाद डोली पनार बुग्याल में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची। रुद्रनाथ के कपाट 19 मई को विधि-विधान से ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में रविवार को तड़के से ही पूजा-अर्चना शुरू हो गई।
पूर्वाह्न 11 बजे भगवान रुद्रनाथ की डोली अपने धाम के लिए रवाना हुई। डोली के साथ करीब 200 भक्त भी रवाना हुए। अब ग्रीष्मकाल में छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा रुद्रनाथ मंदिर में ही होगी। मंडल घाटी में प्रवेश करते ही ग्रामीणों ने रुद्रनाथ से परिवार की कुशलता की मनौतियां मांगीं।
महिलाओं ने भगवान रुद्रनाथ को चावल, धूप और तेल अर्पित कर प्रार्थना की कि ‘हे! रुद्रनाथ राजी खुशी राखी, हमरा कुटुंब परिवार’। रुद्रनाथ भगवान ने सगर गांव स्थित शकलेश्वर महादेव से धाम जाने की आज्ञा मांगी। ग्रामीणों ने भगवान से आपदाओं से मुक्ति दिलाने, विश्व कल्याण और सुख-संपन्नता की कामना की।
इस वर्ष रुद्रनाथ की पूजा का जिम्मा पंडित अनिल तिवारी संभालेंगे। इस मौके पर रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी सुनील तिवारी, हरीश भट्ट, ओम प्रकाश भट्ट, प्रेम बल्लभ भट्ट और महेंद्र नेगी आदि मौजूद थे।
शिव के मुख के होते हैं दर्शन
भगवान रुद्रनाथ पंच केदारों में से एक हैं। यहां भगवान शिव के मुख की पूजा की जाती है। रुद्रनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्री गोपेश्वर से तीन किमी की दूरी मोटर मार्ग से तय कर सगर गांव पहुंचते हैं। सगर गांव से 19 किमी दूर सुरम्य बुग्यालों के बीच भगवान रुद्रनाथ का मंदिर स्थित है।
19 किमी की यह दूरी पैदल ही तय करनी होती है। रुद्रनाथ के पुजारी हरीश भट्ट का कहना है कि सरकार देश-विदेश के तीर्थयात्रियों को उत्तराखंड के तीर्थाटन और पर्यटन पर आने का न्योता तो दे रही है, लेकिन तीर्थ स्थलों और पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं देने की दिशा में कोई पहल नहीं हो रही है।
पंच केदारों के पैदल रास्ते बदहाल पड़े हैं। रुद्रनाथ के पैदल रास्ते में पेयजल की भी सुविधा नहीं है।