मुख्यमंत्री हरीश रावत रविवार देर रात करीब 11.40 बजे शहर के औचक निरीक्षण पर निकले। करीब पौन घंटे के दौरान उन्होंने शहर कोतवाली, दून अस्पताल, आराघर चौकी और रेलवे स्टेशन का जायजा लिया।
बिना किसी पूर्व सूचना के निकले
रात 12.30 बजे वह अपने आवास बीजापुर गेस्ट हाउस पहुंचे। अचानक मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ गए। सीएम बिना किसी पूर्व सूचना के निकले थे।
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मुख्यमंत्री सबसे पहले अचानक शहर कोतवाली पहुंचे। बिना किसी पूर्व सूचना के सीएम के पहुंचने से कोतवाली में हड़कंप मच गया। सीएम ने यहां पर बंदी गृह का भी निरीक्षण किया।
यहां पर एक महिला सिपाही को देखकर उन्होंने कहा कि रात में कम से कम दो महिला सिपाहियों की तैनाती होनी चाहिए।
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इस पर कोतवाल ने कल से रात में दो महिला सिपाहियों की तैनाती करने की बात कही। सीएम ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि उनकी तरफ से किसी के साथ गलत नहीं होना चाहिए।
कोतवाली से निकल कर सीएम दून अस्पताल पहुंचे। यहां पर उन्होंने इमरजेंसी का निरीक्षण किया। सीएम ने अस्पताल के शौचालय का जायजा तो हैरान रह गए। वहां न तो लाइट थी न ही सफाई हुई थी।
सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण
सीएम ने पूछा कि इसकी हालत ऐसी क्यों है? तो अस्पताल प्रबंधन के पास इसका जवाब नहीं था। सीएम ने सभी व्यवस्थाएं ठीक करने की हिदायत दी। दून अस्पताल के बाद मुख्यमंत्री आराघर चौकी गए। यहां उन्होंने सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
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इसके बाद रेलवे स्टेशन यह जानने के लिए पहुंचे कि ट्रेनों का इंतजार करने वाले यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था है कि नहीं। स्टेशन पर उन्हें कुछ खामियां मिलीं लेकिन उन्होंने जाहिर नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि सभी जगहों के निरीक्षण में मुख्यमंत्री को कई खामियां मिली हैं।
जानबूझकर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी
मौके पर उन्होंने जानबूझकर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की। सीएम की योजना है कि संबंधित विभागों के आला अधिकारियों से बात करके पाई गई खामियों का निराकरण किया जाए।
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सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री को जब भी समय मिलेगा शहर के सार्वजनिक स्थलों और दफ्तरों का इसी तरह औचक निरीक्षण करते रहेंगे।
अचानक दौरे पर मुख्यमंत्री कुछ लोगों के साथ ही निकले थे लेकिन कोतवाली तक पहुंचने में उनके साथ 50 से अधिक कार्यकर्ता हो लिए। सीएम के साथ पूर्व विधायक रंजीत रावत, पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता राजीव जैन, जसबीर रावत और नंदन गुकतियाल भी थे।