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गैरों पर करम करते-करते अपनों पर सितम कर बैठे रावत

Mon, 10 Feb 2014 10:53 AM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
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गैरों पे करम अपनों पे सितम, कुछ इसी अंदाज में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों काम कर रहे हैं।
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समर्थकों में फिलहाल धैर्य और लचीलापन
प्रदेश में राजनैतिक हालत इस तरह के बन गए हैं कि उसमें सितम अपनों पर ही होना है। रावत जिस धैर्य और लचीलेपन का परिचय दे रहे हैं उनके समर्थकों को भी फिलहाल धैर्य और लचीलापन दिखाना ही पड़ेगा।

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13 साल के वनवास के बाद सत्ता में जो भी बंटवारा हो रहा है उसमें पुराने चेहरे ही दिख रहे हैं। हरीश रावत रविवार को मीडिया से रूबरू हुए तो उनके ठीक बगल में साकेत बहुगुणा आकर बैठ गए।
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दिल्ली से हवाई जहाज से हरीश रावत के साथ ही साकेत बहुगुणा भी आए थे। मुख्यमंत्री के साथ प्रेस कांफ्रेस में भी पहुंचे। जबकि बहुगुणा सरकार में रावत समर्थक साकेत बहुगुणा से दूरी बनाकर ही चल रहे थे।

साकेत बहुगुणा की मौजूदगी पर सवाल
साकेत बहुगुणा की मौजूदगी पर सवाल उठना स्वाभाविक था। हरीश रावत से जब पूछा गया कि चाचा के बगल में भतीजे के बैठने के राजनैतिक मायने मतलब क्या हैं। रावत ने कहा आप जो भी निकाल लें।

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फिर मंच की ओर से बैठे अन्य नेताओं की तरफ हाथ कर बोले ये सारे चाचा जानें। साफ है रावत अभी कोई राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहते हैं खासकर गढ़वाल के एंगल पर। मंच पर जो भी नेता थे सब गढ़वाल के थे।

रावत उत्तराखंड की कैनवास पर ऐसी तस्वीर बनाने में जुटे हैं जब तक पूरी नहीं होती पता नहीं चलेगा कि क्या है। मंच पर हरीश रावत के साथ ही कुछ अन्य कुर्सियां भी डाली गई थीं। अचानक साकेत के पहुंचने से कुछ हलचल हुई।

तमाम सवाल खड़े हुए
राजीव जैन उन्हें रावत के बगल की कुर्सी ऑफर कर दी। उनके ठीक बगल में टिहरी से पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय बैठे थे। टिहरी लोकसभा सीट के लिए एक मंच पर अगल-बगल दो दावेदारों बैठना भी तमाम सवाल खड़े कर रहा था।

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किशोर उपाध्याय को रावत कैंप का माना जाता है। प्रेस कांफ्रेस में पूर्व मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र अग्रवाल और पूर्व मंत्री सूर्यवीर सिंह सजवाण भी मौजूद थे।
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तिवारी की सीख पर काम
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शपथ ग्रहण केबाद बताया था कि पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने उन्हें आर्शीवाद भी दिया और सीख भी।

उन्होंने सीख क्या दी यह तो नहीं बताया लेकिन सूत्र बताते हैं उन्होंने रावत से बच्चों को फिलहाल राजपाट से दूर रखने को कहा था।

यही कारण है कि राजनीति में सक्रिय उनके बेटे आनंद और वीरेन्द्र पिता के सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हैं। बेटी अनुपमा उन स्वागत समारोह में जरूर पहुंच रही हैं जहां हरीश रावत खुद नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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