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देहरादून : लैपटॉप तो दे दिया, लेकिन इंटरनेट के लिए अभी तक नहीं की व्यवस्था

Wed, 11 Aug 2021 01:54 AM IST
देहरादून ब्यूरो न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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सरकार ने राशन वितरण की व्यवस्था के लिए सस्ते गल्ले के विक्रेताओं को लैपटॉप तो दे दिए, लेकिन अभी तक इंटरनेट की व्यवस्था नहीं की। पिछले चार साल में शुरूआत में एक बार ही विक्रेताओं को इंटरनेट के लिए पैसों को भुगतान किया है। इसके बाद इंटरनेट के भुगतान के लिए विक्रेता डीएसओ कार्यालय से लेकर शासन के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें इसका भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में विक्रेताओं को खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है।

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दरअसल, सरकारी राशन का वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए चार साल पहले सरकार ने हर राशन विक्रेता को एक लैपटॉप, बायोटिक मशीन और एक इंटरनेट डोंगल उपलब्ध कराया था। शुरुआत एक साल तक यह लैपटॉप, बायोटिक मशीन दुकानों में ऐसे ही पड़े रहे। जानकारी न होने और ऑनलाइन वितरण अनिवार्य न होने के कारण राशन विक्रेताओं ने इसका यूज ही नहीं किया।

जब से राशन वितरण का काम ऑनलाइन हुआ तो मजबूरन दुकानदारों को इसका उपयोग करना पड़ा। दुकानदारों को आश्वासन दिया गया था, कि उन्हें हर माह इंटरनेट का अलग से पैंसा दिया जाएगा, लेकिन आज तक दुकानदारों को इसका पैैसा नहीं मिला है। दुकानदारों का कहना है कि इंटरनेट का शुल्क खुद ही भुगतान पड़ता है। कई दुकानदार ऐसे हैं, जिन्हें लैपटॉप चलाना नहीं आता, जिसके कारण उन्हें कर्मचारी रखना पड़ रहा है।
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वहीं दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट की भी समस्या होती है। राशन डीलर कई बार अपनी समस्याओं से डीएसओ से लेकर आयुक्त और शासन तक अवगत करा चुके हैं, लेकिन आज तक न तो उन्हें इंटरनेट का भुगतान हो रहा है और न ही अन्य सुविधाएं दी जा रही है। राशन विक्रेता परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि ऐसा ही चलता रहा तो काम करना बहुत कठिन हो जाएगा। सरकार को उन्हें काम के लिए कर्मचारी देना चाहिए या प्रत्येक माह 15 हजार रुपये अतिरिक्त दे।

35 डीलरों को मिला ई-पॉस मशीन
अब बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के ही बायोमीट्रिक मशीन प्रणाली से राशन वितरण हो सकेगा। इसके लिए जिला आपूर्ति विभाग जिन्हें लैपटॉप नहीं मिला है, उन्हें ई-पॉस (इलेक्टॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनें दे रहा है। करीब 35 डीलरों को यह मशीन उपलब्ध कराई जा रही है। जिले में 1050 राशन डीलर हैं। इनमें से 1015 को लैपटॉप, बायोमीट्रिक मशीन और इंटरनेट डोंगल दिया गया है। बाकी डीलरों को ई-पॉस मशीनें दी जा रही है। कुछ विक्रेताओं को इसका वितरण हो भी चुका है। जिला पूर्ति अधिकारी जसंवत सिंह ने कहा कि दूरस्थ इलाकों में यह मशीन कारगर साबित होगी। इसमें बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी बायोमीट्रिक प्रणाली से वितरण का डाटा फीड हो जाता है।

इंटरनेट का शुल्क उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, राशन डीलरों को इसका भुगतान किया जाएगा। फिलहाल उन्हें खुद ही इसका भुगतान करना पड़ेगा।
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-जसवंत सिंह कंडारी, जिलापूर्ति अधिकारी

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