साठ के दशक में जागेश्वर मंदिर से चोरी हुई लकुलीश की दुर्लभ मूर्ति शुक्रवार को जागेश्वर स्थित एएसआई के संग्रहालय में पहुंच गई है। तस्करों ने इस मूर्ति को न्यूयार्क (अमेरिका) पहुंचा दिया था। कई वर्षों तक यह मूर्ति न्यूयार्क स्थित मेट्रोपोलिटन संग्रहालय की शोभा बनी रही लेकिन बाद में सांस्कृतिक विरासतों को लेकर यूनेस्को संधि होने के बाद 1999 में यह मूर्ति भारत को सौंप दी गई। तब से यह दिल्ली में ही थी।
नवीं-दसवीं शताब्दी (कत्यूरी काल) में पत्थर की बनी लकुलीश की यह अद्भुत मूर्ति जागेश्वर स्थित लकुलीश के मंदिर में स्थापित थी। साठ के दशक में इस मूर्ति को तस्कर चुरा ले गए। काफी खोजबीन के बाद भी मूर्ति का पता नहीं लग सका।
तस्करों ने इस दुर्लभ मूर्ति को अमेरिका पहुंचा दिया। बाद में यह मूर्ति न्यूयार्क स्थित मेट्रोपोलिटन संग्रहालय स्थापित हो गई। मालूम हो कि पूर्व में चोरी हुई सांस्कृतिक विरासतों और मूर्तियों आदि को लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में कोई आपसी नीति नहीं थी, जिससे विभिन्न देशों के संग्रहालय चोरी की मूर्तियां भी खरीद लिया करते थे।
नब्बे के दशक में सांस्कृतिक विरासतों और दुर्लभ मूर्तियों आदि को लेकर यूनेस्को संधि होने के बाद 1999 में अमेरिकी सरकार ने लकुलीश की इस दुर्लभ मूर्ति को भारत सरकार को सौंप दिया।
जागेश्वर में सुरक्षा के उचित प्रबंध नहीं होने के कारण लकुलीश की इस मूर्ति को पुरातत्व सर्वेक्षण के केंद्रीय पुरावशेष संकलन अनुभाग पुराना किले में रखा गया था। पिछले कुछ सालों से देहरादून में अधीक्षण पुरातत्वविद् रहे डॉ. डीएन डिमरी (वर्तमान में निदेशक पुरावशेष एएसआई) और वर्तमान अधीक्षण पुरातत्वविद् देहरादून अतुल कुमार भार्गव इस मूर्ति को जागेश्वर भेजने के लिए प्रयासरत थे।