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सफलता: कोलकाता के ट्रैकरों ने की कफनी ग्लेशियर के नए रास्ते की खोज, आसान नहीं था सफर, पढ़िए इनके जुनून की कहानी

Mon, 23 May 2022 05:52 PM IST
रेनू सकलानी शंकर पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर

सार

दलनायक तुत्तन दत्ता ने बताया कि वे 1987 से कई बार बागेश्वर के ग्लेशियरों की सैर करते रहे हैं। सुंदरढूंगा घाटी के दुर्गाकोट, भानुटी और कनकटा टॉप की सफलता पूर्वक चढ़ाई करने के अलावा ग्लेशियरों में कई बार ट्रैकिंग कर चुके हैं। 
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ट्रैकर्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोलकाता से आए ट्रैकरों के एक दल ने कफनी ग्लेशियर के नए मार्ग की खोज करने में सफलता प्राप्त की है। ट्रैकरों ने झूनी से सरमूल टॉप, नंदाकुंड होते हुए कफनी तक की यात्रा की। इससे पूर्व किसी भी ट्रैकिंग दल ने इस मार्ग से यात्रा नहीं की है। हालांकि क्षेत्र के अनवाल और स्थानीय लोग इस मार्ग से परिचित थे, लेकिन पहली बार किसी ट्रैकर दल ने इस मार्ग की खोज कर ग्लेशियरों की सैर करने वालों के लिए नया मार्ग खोल दिया है।

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कोलकाता की चारोनिक संस्था के चार सदस्यों ने इस मार्ग से पहली बार सुरक्षित तरीके से कफनी ग्लेशियर तक की यात्रा की है। दल का नेतृत्व तुत्तन दत्ता (62) ने किया। दल में सनथ सरकार (66), तपन चौधरी (58) और कुशल मंडल (28) शामिल थे। आठ मई को दल कपकोट के झूनी गांव से पैदल यात्रा पर रवाना हुआ था। ट्रैकरों ने भैंसखाली, पकवाटॉप, लकड़हारी, कोतेला बुग्याल, नंदाकुंड, नंदनियार होते हुए कफनी ग्लेशियर के समीप खटिया तक गया।

वापसी में दल द्वाली होते हुए खाती पहुंचा। शनिवार को दल के सदस्य बागेश्वर होते हुए कोलकाता को रवाना हो गए हैं। नए मार्ग से कफनी की यात्रा करने के बाद दल के सदस्य बेहद उत्साहित थे। पूरे सफर के दौरान दल ने पहाड़ों में 40 किमी की पदयात्रा की। ट्रैकरों के साथ स्थानीय पोर्टर और गाइड तारा सिंह, नरेंद्र सिंह, दरबान सिंह, सोनू सिंह, गोविंद सिंह भी शामिल थे, जिनकी मदद से ट्रैकरों ने लकड़हारी से आगे का कुछ मार्ग रोपवे की मदद से पार किया।

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ट्रैकरों का पसंदीदा मार्ग बनेगा 

दलनायक तुत्तन दत्ता ने बताया कि वे 1987 से कई बार बागेश्वर के ग्लेशियरों की सैर करते रहे हैं। सुंदरढूंगा घाटी के दुर्गाकोट, भानुटी और कनकटा टॉप की सफलता पूर्वक चढ़ाई करने के अलावा ग्लेशियरों में कई बार ट्रैकिंग कर चुके हैं। बताया कि इस मार्ग के बारे में स्थानीय लोगों से सुना था, लेकिन पहली बार यहां से होकर कफनी तक की यात्रा की है। मार्ग में चुनौतियां काफी हैं लेकिन प्रकृति के शानदार नजारों के दीदार भी होते हैं। उन्होंने कहा क
अगर इस मार्ग को विकसित किया गया तो आने वाले समय में ट्रैकरों का पसंदीदा मार्ग बन जाएगा। 
 

सरमूल और नंदाकुंड में बिताया समय

झूनी से कफनी को जाने वाले मार्ग में सरयू नदी का मूल उद्गम स्थल सरमूल और नंदाकुंड भी पड़ता है। लकड़हारी के पास सरयू का उद्गम माना जाता है। जहां से नदी धारा केरूप में निकलती है। इसी मार्ग पर आगे नंदाकुंड और राक्षस कुंड स्थित हैं। इसी स्थान से नंदा महोत्सव के लिए स्थानीय लोग ब्रह्मकमल लाते हैं। ट्रैकरों ने इन स्थलों पर जाकर प्रकृति का भरपूर लुत्फ उठाया।

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मैकतोली और नंदादेवी टॉप के होते हैं दीदार

झूनी से कफनी को जाने वाले मार्ग से मैकतोली, नंदादेवी मेन, नंदादेवी ईस्ट के दीदार होते हैं। ट्रैकरों के लिए इन चोटियों को करीब से देखना बेहद रोमांचक क्षण होता है। वहीं सुंदरढूंगा और पिंडारी ग्लेशियर और घाटी का क्षेत्र भी बेहद आकर्षक नजर आता है।

कोलकाता के ट्रैकरों का झूनी से कफनी तक की यात्रा करना बेहद उत्साहजनक है। अब तक इस मार्ग से केवल स्थानीय लोग ही आवागमन करते थे। ट्रैकरों की आवाजाही से क्षेत्र में पर्यटन
को बढ़ाने में मदद मिलेगी। विभाग की ओर से रूट का निरीक्षण करने के बाद विकास के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
- कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर
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