लोहड़ी और मकर संक्राति पर बरेली की पतंगें रामपुर के मांझे से आकाश में उड़ान भरेंगी। त्योहार को देखते हुए पतंगों के साथ सादे और इंडियन मांझे की भी खरीद शुरू हो गई है। बाजारों में कलर फुल, कार्टून, पौनी और तवा पतंगों की मांग सबसे अधिक है। वहीं, अमर उजाला के अभियान के बाद चीनी मांझा पूरी तरह से बाजार से गायब हो गया है। त्योहार को देखते हुए पतंगों का बाजार चमक पर है।
लोहड़ी, मकर संक्राति और बसंत पंचमी जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, लोगों में पतंगबाजी को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। बाजारों में रंग-बिरंगे पतंगों का बाजार भी सज चुका है। धामावाला बाजार स्थित महमूद काइट टेड्रर्स के मालिक शाहिद ने बताया कि त्योहार को देखते हुए लोग पतंग खरीदने शुरू कर दिए हैं। यूपी के बरेली से बड़ी मात्रा में मांझा और रामपुर और कानपुर से पतंगों को मंगवाया गया है। बरेली के ग्रामीण क्षेत्रों में हाथ के बने मांझे को तैयार किया जाता है।
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वहीं, रामपुर और कानपुर देहात में पतंग बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि बाजार में दो से 25 रुपये तक की पतंग उपलब्ध है। खासकर तवा पतंग, अधी, पौनी, छोटी पतंगों की खूब खरीदारी हो रही है। वहीं, बच्चे कार्टून वाली पतंग खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सादे धागे और इंडियन मांझे का प्रयोग पतंग उड़ाने में किया जा रहा है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है और आसानी से टूट जाता है।