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शंकराचार्य बोले, गैर हिंदू हैं केदारनाथ के मुख्य पुजारी

Tue, 02 Jun 2015 09:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि केदारनाथ के रावल हिंदू नहीं हैं। वे लिंगायन संप्रदाय के हैं, जो वेद-पुराणों को नहीं जानते हैं। जबकि वेद-पुराणों के आधार पर केदारनाथ ज्योर्तिलिंग की पूजा होती है। आपदा के बाद रावल ने ज्योर्तिलिंग को गुप्तकाशी ले जाने की बात कही थी, जो गलत थी। उन्होंने यह भी कहा कि जोशीमठ का नाम ज्योर्तिमठ हो।
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श्रीबदरीनाथ-श्रीकेदारनाथ मंदिर समिति विश्रामगृह में पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि रावल बीकेटीसी का कर्मचारी है, जो वेतनभोगी होता है। वर्ष 1973 में शंकराचार्य बनने के बाद से वे केदारनाथ रावल का विरोध करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।

बीकेटीसी एक्ट का दिया हवाला
बीकेटीसी के वर्ष 1935 के एक्ट में भी लिखा गया है कि केदारनाथ में रावल सहित अन्य कोई भी पुजारी, पंडा यहां तक कि कर्मचारी गैर हिंदू नहीं होगा। उन्होंने गंगा नदी पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण का विरोध किया। कहा कि गंगा जब तक अविरल नहीं बहेगी, तब तक उसकी सफाई संभव नहीं है।
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'25 सौ वर्ष पुरानी है यात्रा, ऐसे पहुंचे अन्य सम्प्रदाय वाले'

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में बदरी, केदार, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा 25 सौ वर्ष पुरानी है।

आदिगुरु शंकराचार्य ने अपने शिष्य टुटकाचार्य को इन धामों की पूजा का दायित्व सौंपा था। लेकिन बाद के वर्षों में कुछ समय तक यात्रा नहीं हो पाई। इस वजह से केदारनाथ में अन्य संप्रदायों के लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गए।

केंद्रीय मंत्री ने किए बाबा के दर्शन
रुद्रप्रयाग। नागरिक उड्डयन मंत्री केंद्र सरकार अशोक गजपति राजू पुशापति ने केदारनाथ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए। उन्होंने धाम में यात्रा को लेकर प्रशासन और निम के अधिकारियों से बातचीत की। अपने पारिवारिक दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने त्रिजुगीनारायण के भी दर्शन किए। मंगलवार को वे चमोली जनपद के पीपलकोटी के लिए रवाना हो गए।
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