फायर बेस कमांडर के रूप में 14 जवानों की अगुवाई कर रहे दिगंबर सिंह नेगी कारगिल युद्ध फतह से ठीक एक चोटी पहले गोली के शिकार हुए। इलाज के दौरान उनकी जांघ में लगी गोली निकाल दी गई। हजारों फीट ऊंचाई से गोली दाग रहे दुश्मनों से लोहा लेने वाले दिगंबर सिंह नेगी ने बताया कि वास्तव में कारगिल युद्ध में बेहद कठिन लड़ाई थी। बावजूद इसके भारतीय सेना ने जीत हासिल की।
13 जुलाई 1999 का वह दिन दिगंबर सिंह नेगी आंखों में आज भी उसी तरह तैरता है जैसे वह कल ही की घटना हो। इस दिन कारगिल युद्ध में एक चोटी को फतह करने के बाद वे आखिरी चोटी टाइगर हिल की तरफ बढ़ रहे थे तभी अचानक चोटी से जबरदस्त फायरिंग हुई।
इसी बीच एक गोली उनकी जांघ में लगी और खून बहने लगा। लेकिन उन्होंने होशोहवास नहीं खोया। उपचार के बाद गोली तो निकाल ली गई लेकिन रिटायर्ड होने के बाद भी उनकी वह यादें अब तक ताजा हैं।