टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) के जंगलों में वनकर्मी जान जोखिम में डालकर वन और वन्यजीवों की सुरक्षा कर रहे हैं। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा डंडे के भरोसे चल रही है। वनकर्मियों के साथ पूर्व में हुए हादसों से भी वन विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है।
हाल ही में बाघ के हमले में दैनिक श्रमिक सोहन सिंह और फाॅरेस्ट गार्ड राजेश नेगी की जान चली गई थी। केटीआर के प्लेन रेंज में 15 जुलाई 2019 को दैनिक वन श्रमिक सोहन सिंह और इस घटना के तीन माह बाद ही इसी रेंज के चौखंभ क्षेत्र में फारेस्ट गार्ड राजेश नेगी बाघ के हमले में मारे गए। इन घटनाओं के बाद भी आला अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। एक बार फिर 25 अगस्त 2021 को अदनाला रेंज के जंगल में गश्त करते दैनिक श्रमिक संपूर्णानंद (43) पुत्र स्व. आनंदमणी पर बाघ ने हमला कर दिया। वह घायल हुए।
सूत्रों के अनुसार बाघ के हमलों को देखते हुए बुधवार को वनकर्मियों की एक बैठक हो रही है, जिसमें संसाधनों और आधुनिक उपकरणों के न होने से बन रहे हालात पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि टाइगर रिजर्व की वन चौकियां बदहाल पड़ी हैं, वहां पर पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। गश्त करने के लिए जो बंदूकें हैं वे इतनी पुरानी हैं कि उनसे फायरिंग ही नहीं होती। फाॅरेस्ट गार्ड राजेश नेगी की मौत के बाद 22 अक्तूबर, 2019 को वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने वनकर्मियों को आधुनिक उपकरणों से लैस करने की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा तक ही सिमटा हुआ है।
केटीआर में वनकर्मियों को आधुनिक उपकरण, बंदूक और अन्य सामग्री खरीदने के लिए दो करोड़ का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- किशनचंद, डीएफओ कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग, लैंसडौन