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कालसर्प दोष से मुक्ति पाने का मौका आया नजदीक

Tue, 18 Aug 2015 05:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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कालसर्प दोष दूर करने का मौका नजदीक है, हालांकि लोग 19 और 20 अगस्त दोनों ही दिन पंचमी तिथि होने की वजह से लोग असमंजस में हैं।
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ज्योतिषियों के अनुसार 20 अगस्त को ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाए। इस दिन नागों का पूजन किया जाता है। 19 अगस्त को पंचमी तिथि सुबह 5.30 बजे से शुरू होगी जो कि 20 अगस्त को सुबह 8.16 बजे तक रहेगी।

उत्तराखंड विद्वत सभा के आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार भले ही 19 अगस्त को पंचमी तिथि दिनभर रहेगी लेकिन जिस दिन पंचमी का षष्ठी तिथि में मिलन हो उसी दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाना चाहिए।
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इस दिन सर्पों को दूध, दही, घी, शक्कर, शहद आदि से स्नान करा कुश, अक्षत, पुष्प मोदक, मालपुआ आदि से पूजा करनी चाहिए। ब्राह्मणों को भोज कराने और व्रत करने से सर्पों का भय नहीं रहता।

नवग्रह शनि मंदिर के डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार इस दिन घर की दहली पर दोनों ओर गोबर से नाग की आकृति बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए, इससे सर्पों का डर नहीं रहता है।
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ऐसे बनता है कालसर्प योग

यदि किसी जातक के जन्म कुंडली में राहु और केतु के मध्य अन्य सातों ग्रह पड़ जाएं तो ऐसे जातक की जन्म कुंडली में काल सर्प योग बनता है। इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति को धन का अभाव, संतान की हानि, दांपत्य सुख में बाधा, आजीविका में बाधा, कारागार का भय, स्वजनों से त्याग, अकाल मृत्यु आदि हो सकते हैं।

चढ़ाएं नागों के जोड़े
कालसर्प दोष दूर करने के लिए जातकों को मंदिरों में सोना, चांदी, तांबा, पीतल के नाग-नागिनों के जोड़े बनाकर चढ़ाने चाहिए। मंदिर में भगवान शंकर जी का विशेष अभिषेक करना चाहिए।

रूद्राभिषेक कर नौ प्रकार के नागों की प्रतिमा बना उनको नदी में प्रवाहित करना चाहिए। नागों को प्रवाहित करने के बाद स्नान करें। पहने हुए वस्त्रों का त्याग करें। नवीन वस्त्र धारण करने का विधान है। नाग स्त्रोत का पाठ करें।

इस मंत्र का करें जाप
ऊं कुरू कुल्ये हुं फट्

इन नौ प्रकार के नागों की प्रतिमा करें प्रवाहित
अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, महापद्म, नील, शंखपाल, कुलिक, कालिय
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