शहीद के परिजन अपने लाडले की एक झलक पाने के लिए बेचैन थे। वे रविवार शाम तक शहीद के पार्थिव शरीर का इंतजार करते रहे। परिजनों को शनिवार शाम बेटे की शहादत की सूचना मिली थी। इसके बाद से शहीद के पिता छवाण सिंह रावत, मां सरोजनी देवी, पत्नी लता देवी का एक-एक पल बेचैनी और परेशानी में बीत रहा है। शहीद की पुत्री आकांशी (11) पिता के बारे में दादा से पूछती रही। दादा की खामोशी उसे विचलित करती रही। पीपलसारी गांव में शहीद के परिजनों से मिलने वालों का तांता लगा रहा।
सेना की ओर से शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके गांव पीपलसारी ले जाया जाना था। लेकिन भारी बारिश हर जगह परेशानी का सबब बनी रही। बारिश के कारण ढाबखाल के निकट मलबा आने से मार्ग बाधित हुआ। हालांकि लोनिवि की जेसीबी यहां तैनात रही, लेकिन बारिश लगातार होने से मार्ग पर मलबा आता रहा। कंडिया से शहीद के ग्राम पीपलसारी तक के कच्चे मार्ग पर लगातार मलबा आता रहा, जिससे यह मार्ग वाहनों के चलने लायक नहीं रहा।