प्रदेश के टीबी एवं अन्य श्वास के रोगियों को अब देहरादून में ही अत्याधुनिक उपचार की सुविधाएं मिल सकेंगी। एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ के बाद राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल में आइसोलेटेड टेस्ट वार्ड बनाया गया है। 10 बेड के वार्ड में रोगियों को कई तरह की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
टीबी और श्वास संबंधी बीमारियों के मरीजों को अभी तक बेहतर उपचार के लिए एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ का रुख करना पड़ता था। मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनने के बाद अब दून में भी यह सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए अस्पताल में 10 बेड का आइसोलेटेड रेसपिरेटरी वार्ड बनाया गया है।
डिजिटल तकनीक से होगी सप्लाई
इस वार्ड में मरीजों को डिजिटल तरीके से ऑक्सीजन और ग्लूकोज की सप्लाई होगी। इससे मरीज की आवश्यकता के मुताबिक ऑक्सीजन, वैक्यूम की व्यवस्था ऑटोमैटिक तरीके से होती है। अलग वार्ड होने से इन मरीजों के संक्रमण का खतरा भी कम रहेगा। वहीं अन्य मरीजों के संक्रमित होने का डर भी नहीं रहेगा।
चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि रेसपिरेटरी वार्ड बनने से मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। अस्पताल में रेसपिरेटरी विभाग में अलग से चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है। वार्ड बनने के बाद मरीजों का दून में ही बेहतर उपचार हो सकेगा।