फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपदाः पुनर्निर्माण में जुटी, राहत को भूल गई सरकार

Wed, 11 Dec 2013 10:06 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
पुनर्निर्माण के काम में जुटने का दावा कर रही उत्तराखंड सरकार राहत कार्य को भूल चुकी है।
विज्ञापन


पढ़ें, नरेंद्र मोदी बनेंगे जनता के लिए 'परेशानी'

हाल यह है कि राहत के लिए जिलाधिकारियों से समन्वय के लिए जिला स्तर पर गठित की गई हाई प्रोफाइल समितियां अभी तक काम ही शुरू नहीं कर पाई हैं। समितियों के सदस्य ही सरकार से राहत के काम में तेजी न आ पाने की शिकायत कर रहे हैं।

आदेश करने की बात भूल गई सरकार
सरकार भी लगता है कि यह आदेश करने की बात भूल गई है। 17 अगस्त को जारी शासनादेश में कहा गया था कि जिला स्तर पर गठित समिति के सदस्य प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद, स्थानीय विधायक, सामाजिक कार्यकर्ता होंगे।
विज्ञापन


राहत से संबंधित किसी भी विवाद का अंतिम निपटारा यह समिति करेगी। इस बीच प्री फैब्रीकेटेड मकान, राहत सामग्री, संपर्क मार्ग आदि को लेकर सरकार को कई विवादों का सामना करना पड़ा। हर बार यह मामला शासन और सरकार के बीच ही उलझ कर रह गया।

पढ़ें, बजरंगबली के पोस्टर व भगवा झंडों से मच गई खलबली

इस बीच में न तो समिति के सदस्यों ने यह सवाल उठाया कि समितियों की बैठक क्यों नही हो रही है और न ही सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया कि इन समितियों के जरिए विवादों का निस्तारण किया जाए।

इससे न तो राहत कार्य चल सके और न मुआवजा पूरी तरह बंट पाया। इसी तरह पुनर्वास का मसला भी अभी तक छुआ नहीं जा सका है। रुद्रप्रयाग के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र राकेश ने भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में समय नहीं दिया, जिससे यह समितियां पूरी तरह से निष्क्रिय बनी हुई हैं।
विज्ञापन


पढ़ें, जलप्रलय के बाद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 'सूखा'

समितियों को गठित करने का आदेश हुआ था पर यह अभी साफ नहीं है कि समितियां गठित भी हुई या नहीं। ऐसे में राहत कार्य में पारदर्शिता को लेकर भी लोगों के बीच में शंका होती है। जब एक फैसला हुआ था तो उस पर अमल होना चाहिए था।
- गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें