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आपदा: छह माह बाद भी जख्म हरे हैं...

Wed, 11 Dec 2013 09:51 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में आई आपदा आए छह महीने गुजर गए हैं, लेकिन आपदाग्रस्त जिलों के हालात देख कर लगता है कि मानो कल की बात हो।
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कहीं पैदल रास्ते मलबे से पटे हैं तो कहीं पुल ध्वस्त पड़े हैं। उत्तरकाशी में तो आबादी के लिए खतरा बने नदी के मलबे को जनता की गुहार के बाद भी सरकार ने हटवाना शुरू नहीं किया। सोमवार को केंद्र से आपदा पैकेज की मंजूरी मिलने पर अब आस बंधी है कि इन क्षेत्रों में कुछ हालात ठीक होंगे।

अब भी मलबे से पटे हैं पैदल रास्ते
थराली के कई इलाकों में हालात अब भी आपदा के दिन जैसे हैं। अगर कहीं कुछ बदला है, तो टूटे और मलबे से पटे पैदल रास्तों पर काई और हरी घास जमी हुई है, जो राहगीरों के लिए मुश्किलों का सबब बन गई है।
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हल्की सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है। इन मार्गों से जुड़े दर्जनों गांव के लोग परेशान हैं, लेकिन अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई सुध नहीं ली है। शासन के अफसर भी गुहार को अनसुनी कर रहे हैं।

सरकार को नहीं जनता की परवाह
उत्तरकाशी में दूरस्थ इलाकों की बात तो दूर, जिला मुख्यालय के निकटवर्ती घनी आबादी वाले तिलोथ एवं जोशियाड़ा क्षेत्र में भी प्रशासन अभी तक स्थायी रास्ते तैयार नहीं कर पाया है।

न तो आबादी के लिए खतरा बना नदी में जमा मलबा हटाने का काम शुरू हो पाया है और न ही बाढ़ सुरक्षा कार्य ही शुरू हुए हैं। इस बार बाढ़ आई तो भयंकर तबाही होने की आशंका है।
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छह माह में प्रशासन यहां सड़क तो दूर पैदल आवाजाही के रास्ते तक नहीं बना पाया। याचना और आंदोलन कर थक चुके इस क्षेत्र के लोग अब भगवान भरोसे बैठे हैं।

30 पुल ध्वस्त, एक भी नहीं बना
रुद्रप्रयाग में आई आपदा में 30 छोटे-बड़े पुल बह गए थे। अभी तक किसी भी पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। सिर्फ विजयनगर में एक धार्मिक संस्था अस्थायी पुल का निर्माण करा रही है। करीब 10 स्थानों पर ट्राली से काम चल रहा है।

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हालांकि सड़कें खोल दी गईं हैं, लेकिन मलबे से अभी भी भरी हैं। बरसात से पहले उनकी हालत नहीं सुधरी तो फिर वाहनों का आवागमन ठप हो जाएगा।

आपदा पीड़ितों के लिए अस्थायी आवास भी नहीं बन पाए हैं। अभी साढे़ चार सौ से ज्यादा परिवारों को टेंट या टीन शेड में ही गुजारा करना पड़ रहा है।
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