राजधानी दून के अलावा उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में बड़े पैमाने पर खटारा गाड़ियां प्रदूषण फैला रही हैं। परिवहन विभाग ने जनवरी से अब तक ऐसी 5517 गाड़ियों के चालान किए हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार जनवरी से अब तक देहरादून में 1722, हरिद्वार में 891, ऋषिकेश में 847, विकासनगर में 593, रुड़की में 871, टिहरी में 364 और उत्तरकाशी में 229 गाड़ियों के चालान काटे गए हैं। इस दौरान कई संचालक ऐसे भी मिले, जिन्होंने कई सालों से वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच नहीं कराई थी।
आरटीओ (प्रवर्तन) शैलेश तिवारी ने बताया कि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके इसके लिए मोबाइल टीमों के जरिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। गाड़ियों के प्रदूषण स्तर की गुणवत्ता में सुधार के लिए समय-समय पर जांच की जा रही है। सीएनजी-एलपीजी के साथ ही बैटरी संचालित गाड़ियों के संचालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
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यह है प्रावधान
मोटर वाहन नियमावली के नियम 115 के तहत गाड़ियों के पंजीकरण के एक साल बाद प्रदूषण प्रमाण पत्र अनिवार्य है। बीएस-2 और बीएस-3 मॉडल की गाड़ियों के लिए आठ माह, जबकि, बीएस- 4 और बीएस- 6 मॉडल की गाड़ियों को एक साल के लिए प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध होता है। पहली बार बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के पकड़े जाने पर 2500 रुपये और दूसरी बार में पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही गाड़ियों का प्रदूषण स्तर बहुत अधिक पाए जाने पर चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी का पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है।