उत्तराखंड ने योग में अपनी एक अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। तीर्थ नगरी ऋषिकेश योग कैपिटल के रूप में जानी जाती है। लेकिन प्रदेश के सरकारी सिस्टम में अन्य विभागों की तरह योग के लिए कोई ढांचा नहीं है। अब आयुष विभाग आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्सा की तर्ज योग का अलग ढांचा बनाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
उत्तराखंड को पहली बार 21 जून 2018 को चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की मेजबानी करने का मौका मिला था। इससे उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान मिली थी। आयुष और पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश में हर साल योग दिवस मनाया जाता है। लेकिन योग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी सिस्टम में अलग से ढांचा नहीं है। योग भी आयुष चिकित्सा का ही एक अंग है।
अपर सचिव एवं निदेशक आयुर्वेद आनंद स्वरूप का कहना है कि आयुष विभाग के अधीन अभी तक आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सा का ढांचा है। इसी तर्ज पर योग के लिए एक अलग ढांचा बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।