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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवसः महिलाओं की पीड़ा को पोस्टरों के जरिए उजागर कर रहे देवेंद्र

Mon, 08 Mar 2021 01:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal नरेश थपलियाल, अमर उजाला, कोटद्वार
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पोस्टरों में उकेर रहे महिलाओं की पहाड़ जैसी पीड़ा - फोटो : अमर उजाला
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लड़की भी आंख का तारा होती है, वह भी बुढ़ापे का सहारा होती है... जैसी पंक्तियों को पोस्टरों में उकेर कर विगत 35 वर्षों से पर्वतीय क्षेत्र की महिलाओं की पहाड़ जैसी पीड़ा को उजागर कर रहे हैं कलाकार देवेंद्र नैथानी। वह इन पोस्टरों के जरिए लोगों को भी महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने के लिए जागरूक कर रहे हैं। 

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लैंसडौन निवासी देवेंद्र ने महिलाओं के जीवन पर आधारित विभिन्न कवियों की कविताओं को पोस्टरों पर उकेरते हुए उन्हें विभिन्न मैगजीन, अखबारों में प्रकाशित फोटो, स्वयं की खींची गई फोटो और पेंटिंग के माध्यम से नया रूप दिया है। वर्तमान में उन्होंने महिलाओं के जीवन पर आधारित करीब 200 कविताओं पर पोस्टर (कोलॉज) बनाए हैं।
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वे देश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में इन पोस्टरों की प्रदर्शनी के माध्यम से महिलाओं के जीवन को लेकर जन जागृति फैलाने का कार्य कर रहे हैं।


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अमर उजाला से मुलाकात में देवेंद्र ने बताया कि उनको वरिष्ठ चित्रकार स्व. बी.मोहन नेगी से महिलाओं के जीवन पर आधारित पोस्टरों को बनाने की प्रेरणा मिली। अब तक वे उत्तराखंड के सभी शहरों के अलावा अन्य राज्यों में 55 पोस्टर प्रदर्शनी लगा चुके हैं। 

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उनके कोलॉज महिला भ्रूण हत्या से लेकर वृद्धाओं के जीवन के हर पहलू को छूते हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं के जीवन को खुशहाल बनाना उनका उद्देश्य है, इसी उद्देश्य को लेकर वे 55 में से करीब 40 प्रदर्शनी निशुल्क लगा चुके हैं। 

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मनोरोगियों को नई जिंदगी दे रहीं डॉ. सोना

वहीं मनोरोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. सोना कौशल गुप्ता 15 साल से मानसिक अवसाद से जूझ रहे लोगों को नई दिशा दे रही हैं। उत्तराखंड ही नहीं देश के तमाम राज्यों के लोगों को वह अपने संगठन के काउंसिलिंग करती हैं। 

मानसिक अवसाद से जूझ रहे लोगों के इलाज के लिए डॉ. सोना ने परी फाउंडेशन की भी स्थापना की है। वह नशा मुक्ति को लेकर अभियान भी चला रही हैं। डॉ. सोना कौशल गुप्ता के अनुसार लोग उनके पास बेहद गंभीर तनाव के साथ आते हैं और जब वे ठीक हो जाते हैं तो मन को बहुत सुकून मिलता है।

लोगों के उपचार के लिए क्राइसिस टेली हेल्पिंग कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसके जरिए लोग फोन के माध्यम से काउंसिलिंग ले रहे हैं। डॉ. सोना कौशल का मानना है कि दुनिया में तेजी से बदली जीवनशैली के कारण मानसिक रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो चिंता का विषय है।

मिल चुके हैं कई अवॉर्ड 

डॉ. सोना कौशल गुप्ता को चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. बीसी राय पुरस्कार, बेस्ट डॉ. अवॉर्ड, बेस्ट टीचर अवॉर्ड समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सोना कौशल बताती हैं कि उनके पास तमाम ऐसे मरीज आए जो मानसिक अवसाद के चलते आत्महत्या जैसे कदम उठाने को तत्पर थे, लेकिन काउसिलिंग और इलाज के बाद अब वह अपने परिवार के संग खुशी से जिंदगी जी रहे हैं। 
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