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चमोली आपदाः नीती घाटी में पहले भी टूट चुके हैं ग्लेशियर, वैज्ञानिकों के शोध में हुआ खुलासा 

Mon, 08 Mar 2021 01:38 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
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पहले भी आ चुकी हैं आपदाएं - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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चमोली की नीती घाटी में हजारों साल पहले भी ग्लेशियर टूटने और भारी भरकम चट्टानों के दरकने से प्राकृतिक आपदाएं आ चुकी हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। 

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नीती घाटी में पिछले माह आई प्राकृतिक आपदा के बाद अध्ययन में जुटे वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक धौलीगंगा और ऋषिगंगा नदियों के अवसादों का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं पहले भी आ चुकी हैं।
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नीती घाटी में आई प्राकृतिक आपदा पहली घटना नहीं

संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय के अनुसार पिछले माह नीती घाटी में आई प्राकृतिक आपदा पहली घटना नहीं है। नीती घाटी में इस तरह की आपदाएं पहले भी आ चुकी हैं, लेकिन उस समय नदियों पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आबादी नहीं होने से इन घटनाओं के बारे में ज्यादा पता नहीं चला।

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आपदाओं के बारे में ज्यादा जानकारियां सामने आ रही हैं

अब जबकि इन क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां बढ़ी हैं और नदियों पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, सड़कों के निर्माण के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े तमाम निर्माण कार्य हो रहे हैं तो प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली जनहानि और आर्थिक नुकसान के चलते आपदाओं के बारे में ज्यादा जानकारियां सामने आ रही हैं। 

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डॉ. एसके राय का कहना कि सिर्फ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही नहीं, वरन दुनिया के तमाम देशों में स्थित उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। फिलहाल चमोली आपदा के बाद तमाम पहलुओं पर वैज्ञानिकों की टीमें अध्ययन कर रही हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से वैज्ञानिकों की दो टीमों का गठन किया गया है, जो चमोली आपदा के कारणों का पता लगाने के साथ ही भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाली तबाही को कम करने को लेकर सुझाव देंगी।
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