चुनाव में दून में न तो वोटरों ने पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे बागियों को अहमियत दी और न ही महंगाई आदि को मुद्दा बनाकर मतदान किया। बल्कि इस चुनाव में भी प्रदेश के साथ ही दून में मोदी मैजिक बरकरार रहा और लोगों ने प्रत्याशियों की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताते हुए भाजपा को दून में दस में से नौ सीटों पर कब्जा दिला दिया। इससे मतदान से पहले तमाम सियासी पंडितों के दावे धरे के धरे रह गए।
देहरादून की दस विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को जहां बागियों से चुनौती मिलती दिख रही थी तो वहीं महंगाई जैसे मुद्दों से उन्हें जनता के सामने दो-चार होना पड़ रहा था। इसके साथ ही सत्ता विरोधी लहर का डर भी उन्हें सता रहा था। लेकिन इन सब पर मोदी का जादू ज्यादा असरदार रहा। कैंट, धर्मपुर और रायपुर सीट पर सबसे ज्यादा भीतरघात का डर प्रत्याशियों को सता रहा था। साथ ही धर्मपुर और कैंट सीट में तो निर्दलीय मैदान में उतरकर खुलकर बगावत पर उतर आए थे। लेकिन खामोश मतदाताओं ने बागियों को पूरी तरह से नकार दिया। दोनों सीटों पर बागी हजार वोट से ऊपर नहीं ला पाए। हर सीट पर टिकट नहीं मिलने से नाराज कई लोग अंदरखाने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम कर रहे थे लेकिन इसका भी मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ा। रही बात पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेलों के दामों को लेकर शुरुआती नाराजगी भी मतदाताओं ने मतदान केंद्र तक जाते-जाते नकार दी। ध्यान में रहा तो सिर्फ मोदी पर विश्वास है। यही कारण है कि दस से नौ सीटों पर न केवल भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की बल्कि जीत का अंतर भी काफी अधिक रहा।