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उत्तराखंड में उद्योग-धंधों को अब लगेंगे पंख, डेडलाइन जारी

Wed, 15 Jun 2016 08:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 14 सेवाओं के निस्तारण के लिए तीस दिन की डेडलाइन
  • श्रम एवं सेवायोजन विभाग को लेकर मंगलवार को आदेश जारी
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इंडस्ट्री - फोटो : demo pic
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विस्तार
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उत्तराखंड के उद्योग-धंधों को तेजी देने के लिए श्रम एवं सेवायोजन विभाग की 14 सेवाओं के निस्तारण के लिए एक महीने का समय तय कर दिया गया है। मंगलवार को सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा अनुभाग के प्रभारी सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने इस बाबत आदेश जारी कर दिया है।
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यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। ताजा आदेश के तहत इन 14 सेवाओं को यदि संबंधित अधिकारी 30 दिन में निस्तारित नहीं करता है तो उसके ऊपर के दो अफसरों के यहां अपील की जा सकती है। आदेश में 30 वर्किंग-डे यानी कार्य दिवसों की गणना की जाएगी।

आवेदन के साथ आवश्यक कागजात, संलग्नक आदि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद से ही 30 दिनों की गणना होगी। यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि कार्रवाई जानबूझकर नहीं की गई है तो संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। गौरतलब है कि इस आदेश के बाद प्रदेश भर के कुल 19 विभागों की 121 सेवाएं समयबद्ध निस्तारण की सूची में शामिल हो गई हैं। जानकारों के मुताबिक इससे प्रदेश में उद्योग-धंधों की स्थापना को बल मिलेगा।
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निस्तारण न होने पर ऊपर के दो अफसरों के यहां होगी अपील

ऑफिस - फोटो : demo pics
दुकान एवं वाणिज्यिक अधिष्ठान अधिनियम-1962 के तहत दुकान या वाणिज्यिक अधिष्ठान के पंजीकरण या नवीनीकरण की कार्रवाई संबंधित श्रम प्रवर्तन अधिकारी को 30 दिन में करनी होगी। ऐसा न होने पर पहली अपील संबंधित सहायक श्रम आयुक्त और दूसरी अपील उप श्रम आयुक्त के पास की जाएगी।

मोटर परिवहन कामगार अधिनियम-1961 के अंतर्गत पंजीकरण की कार्रवाई संबंधित उप श्रम आयुक्त को 30 दिन में करनी होगी। ऐसा न होने की दशा में संबंधित अपर श्रम आयुक्त को प्रथम अपील की जाएगी। निस्तारण न होने की दशा में श्रम आयुक्त के पास दूसरी अपील की जा सकेगी।

संविदा श्रम अधिनियम-1970 के अंतर्गत ठेकेदार एवं मुख्य नियोक्ता का पंजीकरण एवं नवीनीकरण की कार्रवाई संबंधित सहायक या उप श्रम आयुक्त को 30 दिन में करनी होगी। निर्धारित तिथि तक काम न होने की दशा में अपर श्रमायुक्त के यहां प्रथम और श्रमायुक्त को दूसरी अपील की जा सकती है।

औद्योगिक अधिष्ठान (स्थायी आदेश) अधिनियम-1946 के अंतर्गत स्थायी आदेश के हिंदी और अंग्रेजी अनुवादों का प्रमाणीकरण की कार्रवाई संबंधित उप श्रम आयुक्त को 30 दिन में करनी होगी। निर्धारित तिथि में कार्रवाई पूरी न होने पर अपर श्रमायुक्त को प्रथम व श्रम आयुक्त को दूसरी अपील की जा सकती है।

भन एवं सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम (नियोजन तथा सेवा की शर्तें) 1996 के अंतर्गत अधिष्ठान और श्रमिकों के पंजीकरण की कार्रवाई संबंधित श्रम प्रवर्तन अधिकारी और इनके नवीनीकरण की कार्रवाई सहायक श्रमायुक्त को 30 दिन में करनी होगी। ऐसे न होने की दशा में क्रमश: सहायक और उप श्रमायुक्त के यहां पहली और उप श्रमायुक्त व अपर श्रमायुक्त के यहां दूसरी अपील हो सकेगी।
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जानबूझकर लापरवाही बरतने पर प्रतिदिन 250 रुपये जुर्माना भी

- फोटो : Demo pic
कारखाना अधिनियम-1948 के अंतर्गत योजना एवं निर्माण, विस्तार या फिर किसी भवन को कारखाने के रूप में प्रयोग की अनुमति, अधिष्ठानों का पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए अलग नियम हैं। इसमें इन सभी कार्यों के लिए 300 कर्मचारी होने की दशा में संबंधित सहायक निदेशक और इससे ज्यादा कर्मचारी होने की दशा में संबंधित उप निदेशक को 30 दिन में कार्रवाई संपन्न करनी होगी।

ऐसा न होने की दशा में 300 श्रमिकों तक वाले कारखाने उप निदेशक के यहां और इससे ज्यादा श्रमिक होने की दशा में मुख्य कारखाना निरीक्षक के यहां प्रथम अपील कर सकेंगे। वहीं इसी तरह द्वितीय अपील के लिए क्रमश: मुख्य कारखाना निरीक्षक और अपर सचिव श्रम को जिम्मेदारी दी गई है।

बॉयलर अधिनियम-1923 के अंतर्गत अधिष्ठानों का पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए आवेदन आने की दशा में संबंधित उप निदेशक को 30 दिन में आवेदन निस्तारण करना होगा। ऐसा न होने की दशा में क्रमश: श्रम आयुक्त और केंद्रीय बॉयलर बोर्ड में दूसरी अपील की जाएगी।
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