जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ अत्याचार तब तक नहीं थमेगा, जब भारत एक महाशक्तिशाली राष्ट्र नहीं बन जाता। उन्होंने इस बात का विरोध किया कि इंदिरा गांधी ने कभी मुस्लिम धर्म अपनाया था। शंकराचार्य ने कहा कि नेहरू परिवार ने हमेशा देश हित के लिए कार्य करते हुए बलिदान दिया है।
मंगलवार को कनखल स्थित मठ में पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि जब आप मजबूत होंगे तभी दूसरे लोग इज्जत करेंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि इंदिरा गांधी ने पारसी युवक से प्रेम विवाह किया था, लेकिन उन्होंने कभी धर्म नहीं बदला। धर्म परिर्वतन की बात विरोधी करते हैं, लेकिन इंदिरा गांधी ने हमेशा देवी देवताओं की पूजा की। इंदिरा गांधी ने विदेशी सभ्यता को भी नहीं अपनाया।
अमेरिका दौरे में इंदिरा ने डांस करने से किया इनकार
स्वामी स्वरूपानंद
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बताया कि जिस समय वह प्रधानमंत्री थी और अमेरिका दौरे पर गई तो वहां पर एक पार्टी में उन्हें डांस करने को कहा, लेकिन इंदिरा गांधी ने पद की गरिमा को निभाते हुए डांस करने से इनकार कर दिया। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री का भी उदाहरण दिया कि वह कभी विदेशियों के आगे झुके नहीं।
शंकराचार्य ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद ने कभी नहीं चाहा कि अयोध्या में राम मंदिर बने। वह मंदिर पर केवल राजनीति कर रहे हैं। दूसरे वह हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, हिंदू धर्म की नहीं।
उन्होंने कहा कि विहिप कहती है कि कोई भी मुस्लिम भारत माता की जय बोलता है तो वह मोहम्मद पंथी भाई हो जाता है। उन्होंने कह कि धर्म पंथ नहीं है। धर्म मानवता को ऊपर उठाने वाला है।
हिंदू व जैन धर्म में कई समानता
स्वामी स्वरूपानंद
शंकराचार्य ने जैन धर्म और हिंदू धर्म के अनुयायियों में कई समानता बताई। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के लोग अपने को हिंदू धर्म से अलग नहीं मानते, वह शिव, विष्णु, देवी देवताओं को मानते हैं। जैन तीर्थकरों को मानते हैं और उसके लिए कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने सबसे अच्छी बात यह है कि बौद्घ धर्म हो या जैन सभी भारत की जमीं पर पैदा हुए है।
केवल क्षत्रिय ही कर सकता है आखेट
शंकराचार्य ने कहा कि आखेट (शिकार) करना केवल क्षत्रिय लोगों का काम है, उन्हें भी गोमांस का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है। क्षत्रियों के अलावा अन्य कोई जाति धर्म के व्यक्ति को मांस का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने क्षत्रियों को भी मांस न खाने की सलाह दी।
कोहिनूर हीरा हमारी विरासत
शंकराचार्य ने कहा कि कोहिनूर हीरा हमारा है। वह देश की सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। इसको वापस लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में अंग्रेज सहयोग करने के नाम पर मुआवजा लेते थे, इसी के बदले में कोहिनूर दिया गया था। यह कहना गलत है कि किसी भी शासक ने उस समय अंग्रेजों को तोहफा दिया था। अंग्रेज तो उस समय कत्लेआम कर छीन लेते थे। उन्होंने नेपाल से हुए युद्घ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अंग्रेजों ने गढ़वाल को दो भागों में बांट दिया था।