उत्तराखंड से देश को मिले 43 अफसर
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से पास आउट होने वाले जेंटलमैन कैडेटों में 43 उत्तराखंड के हैं। यह शनिवार को पासआउट हुए 319 भारतीय कैडेटों की संख्या का 14 फीसदी है। इस बार भी पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के कैडेटों की संख्या सबसे अधिक 45 हैं।
राज्यवार कैडेटों की संख्या
उत्तर प्रदेश से 45, उत्तराखंड से 43, हरियाणा से 34, बिहार से 26, राजस्थान से 23, पंजाब से 22, मध्य प्रदेश से 20, महाराष्ट्र से 20, हिमाचल प्रदेश से 13, जम्मू कश्मीर से 11, दिल्ली से 11, तमिलनाडु से 7, कर्नाटक से 6, केरल से 5, आंध्र प्रदेश से 5, चंडीगढ़ से 5, झारखंड से 4, पश्चिम बंगाल से 3, तेलंगाना से 3, मणिपुर से 2, गुजरात से 2, गोवा से 2, उड़ीसा से 2, असम से 2, मिजोरम से 2, छत्तीसगढ़ से 2, मिजोरम से 2।
इन्हें मिला अवॉर्ड:
स्वॉर्ड ऑफ ऑनर-एसीए अनमोल गुरुंग
ऑर्डर ऑफ मेरिट में स्वर्ण पदक- एसीए अनमोल गुरुंग
रजत पदक - बीओ तुषार सपरा
कांस्य पदक - बीसीए आयुष रंजन
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर - केरेन कॉय
श्रेष्ठ विदेशी कैडेट - बीओ सांगे फेनडेन दोरजी (भूटान)
रजत पदक (टीजीसी)जूनियर अंडर आफिसर कुणाल चौबीसा
पीओपी में शामिल होने वाले सातवें राष्ट्रपति बने रामनाथ कोविंद
स्थापना के बाद आईएमए में अब तक हुईं पासिंग आउट परेड की सलामी लेने वाले सातवें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हैं। इससे पहले छह राष्ट्रपति आईएमए के इन गौरवशाली क्षणों के साक्षी बन चुके हैं। 10 दिसंबर 1932 को भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की स्थापना हुई थी। साल में दो बार यानी जून व दिसंबर में आईएमए से युवा अफसरों की टोली बतौर अफसर सेना का अभिन्न अंग बनते हैं।
अकादमी की स्थापना के बाद सबसे पहले दिसंबर 1956 में हुई पीओपी में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने परेड की समीक्षा की थी। इसके बाद दिसंबर 1962 में राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, दिसंबर 1976 में राष्ट्रपति फखरुद्दीन अहमद, जून 1992 में राष्ट्रपति आर वेंकटरमण, दिसंबर 2006 में राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम और जून 2011 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी पासिंग आउट बैच के कैडेटों से सलामी ले चुकी हैं।
किस देश को कितने अफसर मिले
देश - अफसर
भारत-319
अफगानिस्तान- 40
भूटान-15
तजाकिस्तान-5
श्रीलंका-2
नेपाल-1
मालद्वीव-1
म्यांमार-1
तंजानिया-1
तुर्किमेनिस्तान- 1
वियतनाम-1
कई दिन से की जा रही थी परेड को यादगार बनाने की तैयारी
वर्ष 1971 के भारत- पाक युद्ध में भारतीय सशस्त्र सेनाओं की जीत के पचास साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित हो रही परेड को यादगार बनाने की तैयारी कई दिन पहले से की जा रही थी। लेकिन इस बीच दो दिन पहले तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत सेना व वायुसेना के 13 अधिकारियों व जवानों की मौत हो जाने से यकायक परिदृश्य बदल गया।
सीडीएस जनरल रावत को भी राष्ट्रपति के साथ परेड में शिरकत करने के लिए आईएमए पहुंचना था, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। सीडीएस के निधन पर घोषित राजकीय शोक के चलते अकादमी को बीते दिन कमांडेंट परेड (फुल ड्रेस रिहर्सल परेड) को स्थगित करना पड़ा, साथ ही मुख्य पासिंग आउट परेड की पूर्व संध्या पर आयोजित होने वाले दो अन्य कार्यक्रम भी रद्द करने पड़े। पीओपी को भी सादगी से आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
पीओपी के मद्देनजर अकादमी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। चप्पे-चप्पे पर सेना के सशस्त्र जवान तैनात हैं। अकादमी परिसर के बाहरी क्षेत्र में सुरक्षा का जिम्मा दून पुलिस के पास है। पासिंग आउट परेड के दौरान शनिवार सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक पंडितवाड़ी से लेकर प्रेमनगर तक जीरो जोन रहा। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-72 (चकराता रोड) से गुजरने वाला यातायात प्रेमनगर व बल्लूपुर से डायवर्ट रहा।