उत्तराखंड प्रदेश के कुमाऊं मंडल में खनन माफिया सिस्टम की शह पर मौज काट रहे है।
वन ग्रामों में सड़क जैसे विकास कार्य कराने में जंगलात महकमे के अफसर तमाम कुतर्क पेश करते हैं लेकिन अपने जंगल की जमीन पर खनन करने वाले सूरमाओं को रास्ते मुहैया करा देते है। यह काम वैसे तो गढ़वाल में भी हो रहा है लेकिन कुमाऊं में सफेद पॉश लोग इसमें सीधे तौर पर शामिल है।
भले ही वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी छापे मारते फिरे और भले ही दूसरी टीमे अवैध खनन रोकने का काम करे लेकिन तस्वीर कुछ और ही है। कुमाऊं क्षेत्र में खनन करने वालों को जंगलात महकमा माल ढोने के लिए अपनी जमीन पर रास्ता मुहैया करा रहा है।
ताजा बाजपुर क्षेत्र का है। यहां गुलजारपुर गांव के पास एक क्रशर मालिक को माल ढोने के लिए वन विभाग ने अपनी जमीन रास्ते के लिए दे दी। यह क्रशर एक कांग्रेस नेता का है। इससे पहले भी एक कांग्रेसी के क्रशर के लिए यह मेहरबानी हो चुकी है।
वन के भीतर बसे गांव बुनियादी विकास को तरस रहे हैं और यहीं जंगल सिस्टम की शह पर खनन माफियाओं के लिए रेड कारपेट बन गया है। स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया लेकिन सुनने वाला कोई नहीं।
वन विभाग के एक अफसर ने इस कृत्य को रोकने की कोशिश की लेकिन बाद में विफल हो गया। अब समस्या यह है कि जंगल के बीच से अवैध रूप से रास्ता ले लिया और उसी आड़ में अवैध खनन का माल भी ढोया जा रहा है।