अपने अभियान की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य के मैदानी इलाकों में रहने वाले तमाम लोग त्योहार मनाने के लिए अपने गांव लौट रहे हैं। आज नहीं तो कल इगास उत्तराखंड की पहचान बनेगी। जैसे गरबा गुजरात का है और बिहार की छठ पूजा है।
हरीश रावत ने अनिल बलूनी की मुहिम को सराहा
पूर्व सीएम हरीश रावत ने अनिल बलूनी की लोक पर्व इगास को पुनर्जीवित करने और अपना वोट, अपने गांव मुहिम की सराहना की। उन्होंने कहा कि बलूनी इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। वह अच्छे व्यक्ति हैं, कांग्रेसियों की तरह शाकाहारी व्यक्ति हैं, लेकिन मांसाहारी भाजपाइयों के बीच फंस गए हैं। इसलिए उनकी मुहिम का उतना असर नहीं हो रहा है।
पहाड़ की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है इगास
वहीं प्रदेश कांग्रेस सचिव महेश जोशी ने लोक पर्व इगास की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि यह पर्व हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। जिसे हम दीपावली के ग्यारह दिन बाद एकादशी के दिन मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमारी संस्कृति विलुप्त होती जा रही है, जिसे जीवित रखने के लिए अपने पारंपरिक पर्वों को जिंदा रखना जरूरी है। उन्होंने प्रदेश वासियों से अपील की है कि अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस लोक पर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। अपनी परंपरा और संस्कृति से अपने बच्चों को भी अवगत कराएं।