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भारत-चीन सीमा पर खिसक रहे विशाल हिमखंड, एक दर्जन से ज्यादा गांवों को खतरा

Sun, 21 May 2017 09:14 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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glaciers - फोटो : Getty Images
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भारत-चीन सीमा पर बसे 14 गांवों के लिए खिसकते हिमखंड खतरा बन गए हैं। ग्लेशियरों से बड़े-बड़े हिमखंड खिसक कर सड़क तक आ रहे हैं।
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पिथौरागढ़ से लगी चीन सीमा पर बसे 14 गांवों के लोग निचले इलाकों में स‌र्दियां बिताकर अपने गांवों को लौट रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों को रास्ते में हिमखंडों के दरकने-टूटने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

ग्लेशियरों से बड़े-बड़े हिमखंड अचानक खिसक कर सड़क तक आ रहे हैं, जिन्हें काटकर रास्ता तैयार करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर आए हिमखंड

- फोटो : demo pic
चीन सीमा पर करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे दारमा घाटी के गो, चल, मिलम, रतिदांग, खिमलिंग, बिदांग, सीपू, नाबलिंग, बालिंग, बौन सहित अन्य कई गांवों के लोग सर्दियां धारचूला में बिताते हैं।

एक मई से वह वापस लौटने लगते हैं। इस समय तक ग्लेशियर कठोर होते हैं, तो इनसे कोई खतरा नहीं होता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।

न्यू सोबला से दुक्तू के बीच नाबलिंग में हिमखंड टूटकर सड़क पर आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर आ गए हैं, जिन्हें काटकर रास्ता तैयार किया गया है।

ग्लोबल वार्मिंग के चलते अल्पाइन ग्लेशियरों का वजूद संकट में है
पर्वतारोही पूरमल सिंह धर्मशक्तू का कहना है कि नाबलिंग से दुक्तू के बीच के ग्लेशियर अल्पाइन (सीजनल) हैं। आमतौर पर यह जून महीने में पिघलते हैं, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के चलते अल्पाइन ग्लेशियरों का वजूद संकट में है।
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