उत्तराखंड के चंबा इलाके में एक अस्पताल ऐसा है जहां बिना नर्सों के मरीजों का उपचार होता है। चंबा में 60 के दशक में रेडक्रॉस मातृ-शिशु कल्याण अस्पताल खोला गया था, लेकिन जरूरी संसाधन उपलब्ध न होने के कारण यह शोपीस बनकर रह गया है। अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ का पद रिक्त चल रहा है। एक वर्ष पूर्व नर्सिंग स्टाफ के रिटायरमेंट हो जाने के बाद तो प्रसव और टीकाकरण का कार्य भी बंद हो गया।
1954 में खुला था अस्पताल
चंबा बाजार कई विकासखंडों के दर्जनों गांवों का मुख्य बाजार है। यहां वर्ष 1954 में रेडक्रास ने मातृ और शिशु कल्याण अस्पताल की स्थापना की थी, लेकिन सरकार ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। यहां सुविधाओं के साथ चिकित्सक न होने के कारण प्रसव के लिए आई महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है जबकि पूर्व में यहां एक साल में 300 से अधिक प्रसव होते थे।
भवन की स्थिति बदहाल
बजट के अभाव में भवन की स्थिति जीर्णशीर्ण हो चुकी है। सामाजिक कार्यकर्त्ता तिलकराम चमोली, बचन सिंह नेगी और सुनील गोपाल कोठारी का कहना है कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित डिलीवरी की सुविधा सेवा चौबीस घंटे मिल रही थी। अब लंबे समय से चिकित्सक न होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस में सभी सुविधाएं बहाल की जानी चाहिए।