आज नहाए-खाए के साथ ही तीन दिनों का छठ व्रत शुरू हो जाएगा। मंगलवार को इसके लिए बाजार में व्रतियों ने खूब खरीदारी की। पूजा के लिए गन्ने, सब्जी, फल आदि खरीदे गए। आज शहरभर में कई जगह पूजन किया जाएगा। बिहारी महासभा की ओर से टपकेश्वर में विशेष इंतजाम किए गए हैं। लोगों को दिक्कत ना हो इसलिए इस बार यहां से निकलने के लिए दो गेट बनाए जा रहे हैं।
आज से व्रत की शुरूआत
बुधवार को नहाए-खाए के साथ ही छठ व्रत की शुरुआत होगी। छठ व्रत संतान की कामना और ऐश्वर्य के लिए रखा जाता है। व्रत के पहले दिन शाम को लौकी खाई जाती है। इस दिन महिलाएं पीतल के बर्तन में आम की लकड़ी से (ठेकुआ) प्रसाद बनाती हैं। दूसरे दिन यानी सात नवंबर को खरना मनाया जाएगा।
गुड की खीर होगी वितरित
इस दिन गुड़ की खीर प्रसाद के रूप में सभी को वितरित की जाएगी। आठ नवंबर को शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। साथ ही गन्ना, फल, सब्जी, हल्दी टोकरी और सूप में रखकर सूर्य देवता का पूजन किया जाएगा। महिलाएं पारंपरिक गीत भी गाएंगी। नौ नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का समापन हो जाएगा।
सोते हैं फर्श पर
बिहारी महासभा के महासचिव शशिकांत गिरी ने बताया कि छठ के व्रती फर्श पर सोते हैं। तीन दिनों तक फर्श की साफ-सफाई कर चटाई बिछाकर नीचे ही सोते हैं। अपना खाना स्वयं बनाते हैं। बेहद ही साधारण तरीके का खाना आदि खाया जाता है।
ना हो दिक्कत तो दो गेट
बिहारी महासभा के अध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बताया कि टपकेश्वर परिसर में पंडाल की व्यवस्था की जा रही है। जहां से एनाउंस किया जाएगा कि किसी को भी किसी भी तरह की दिक्कत हो तो वहां संपर्क करे। स्थानीय लोग अलाव और चाय की व्यवस्था करेंगे। सतेंद्र ने बताया कि पहली बार टपकेश्वर से बाहर निकलने के लिए दो गेट बनाए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की दिक्कत ना हो।