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ईमानदारी अभी जिंदा है! पढ़िए, ये कहानी

Mon, 22 Sep 2014 02:16 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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बेईमानों की भीड़ में ऐसे भी लोग हैं जो तमाम दुश्वारियों के बावजूद ईमान के पक्के हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं रामविलास गुप्ता।
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सब्जी बेचकर गुजारा करने वाले रामविलास को सड़क पर पर्स मिला तो उन्होंने इसे असल मालिक तक पहुंचकर सभी के लिए मिसाल कायम की।

पैसे और जरूरी कागजात थे
शास्त्रीनगर में रहने वाले विनोद कुमार गुप्ता और उनका बेटा रामविलास ठेली पर सब्जी बेचते हैं। कुछ दिन पहले जानकीपुरम के मोड़ पर टंकी के पास रामविलास को एक पर्स पड़ा मिला। पर्स में कुछ पैसे और जरूरी कागजात थे।

मालिक का पता नहीं चला तो उन्होंने यह पर्स अपने पिता को सौंप दिया। उन्होंने पर्स को टटोला तो उसमें एक कागज पर सिर्फ ‘मनमोहन भाटिया, इंजीनियर्स एंक्लेव’ लिखा मिला।
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बाप-बेटे ने थोड़ी कोशिश की और मनमोहन भाटिया का पता ढूंढकर रविवार को पर्स उन्हें सौंप दिया। मनमोहन भाटिया उनकी ईमानदारी से बेहद प्रभावित हुए और उन्हें सम्मान के साथ इनाम भी दिया।
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