विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत में राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने बुधवार को दो मायनों में इतिहास रचा। राज्यपाल के अभिभाषण को पक्ष-विपक्ष ने पूरी तल्लीनता से सुना। इसी के साथ डॉ. कृष्णकांत पाल ऐसे पहले राज्यपाल बने जिन्हें विधानभवन में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
हर बार होता था हंगामा
पिछले कुछ समय से विधानसभा में विपक्ष की ओर से राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध जताने की परंपरा सी बन गई थी। कांग्रेस ने भी यही किया था और इसके बाद भाजपा भी यही करती आई। अभिभाषण का एक बार बहिष्कार तक किया गया था।
सदन में अभिभाषण की प्रतियां लहराना, नारेबाजी का माहौल ही अभिभाषण के दौरान दिखता था। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। कुल 55 मिनट के अभिभाषण में पक्ष और विपक्ष की ओर से एक भी शब्द नहीं बोला गया। अभिभाषण समाप्त होने के बाद जरूर विपक्ष ने सरकार का विरोध जताया पर यह भी कुछ क्षणों के लिए ही था।
सत्ता पक्ष भी रहा मौन
खादी वस्त्रों पर छूट का जिक्र करते हुए राज्यपाल कुछ क्षणों के लिए रुके भी। शायद इस उम्मीद में की सत्ता पक्ष के सदस्य ही मेज थपथपा कर स्वागत करेंगे पर पूरे भाषण के दौरान पक्ष भी पूरी तरह से मौन रहा। दूसरी तरफ, प्रदेश में राज्यपाल को विधानसभा में गार्ड ऑफ देने की परंपरा निभाई नहीं जाती रही है। यह पहली बार हुआ कि राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।