कथक डांसर, कलाकार, यू-ट्यूबर नाओमी नौरियाल बताती हैं कि वह एबीआरएसएम लंदन से पियानो कोर्स भी कर रही हैं। कोर्स की भाषा अंग्रेजी है, लेकिन उन्हें इसे समझने के लिए नोट्स हिंदी में ही बनाने पड़ते हैं। बतौर नाओमी मैं हिंदी में ही ज्यादा सहज महसूस करती हूं। 12वीं की छात्रा यू-ट्यूबर नाओमी नौरियाल उत्तराखंड के बॉलीवुड कलाकारों का इंटरव्यू लेती हैं। उनका कहना है कि वह उत्तराखंड को आगे बढ़ाना चाहते हैं इसलिए हिंदी और क्षेत्रीय भाषा आनी चाहिए। कलाकारों के इंटरव्यू के वक्त भी वह हिंदी में ही बात करने पर विशेष जोर देती हैं।
हिंदी से राज्य के बाहर भी बना पाया पहचान : दीपक चमोली
मैं हिंदी को इस बात का श्रेय दूंगा कि मैं राज्य के बाहर भी लोगों के बीच अपनी पहचान बना पाया हूं। क्षेत्र में हम अपनी स्थानीय भाषा का प्रयोग करते हैं, लेकिन जब बाहर जाते हैं तो अंग्रेजी बोलने में सहज नहीं होते हैं। ऐसे में हिंदी के जरिए ही हम आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं। सोशल मीडिया पर भी हिंदी का प्रयोग मुझे प्रभावी लगता है। अब मैंने हिंदी गाने बनाने में शुरू किए है। मैं समझता हूं कि इसके जरिए हिंदी भाषी बड़े तपके के बीच मैं अपनी पहचान ज्यादा गहरी बना सकती हूं।
हिंदी में ज्यादा आसानी से रख पाता हूं अपने विचार : पंकज सती
कलाकार पंकज सती का कहना है कि सोशल मीडिया पर हिंदी ताकत बनकर उभरी है। इसका खास कारण यह भी है कि अब सोशल मीडिया पर केवल युवा वर्ग ही सक्रिय नहीं है, बल्कि हर वर्ग चाहे वह बुजुर्ग हो या महिला। हर कोई इंटरनेट पर सक्रिय है। वह अपनी सहजता के हिसाब से अपने लिए कंटेंट चाहता है। जाहिर तौर पर हिंदी कंटेंट पढ़ने और देखने वालों की संख्या भी भारी तादाद में है। इसलिए भले ही इंटरनेट पर अंग्रेजी का साम्राज्य हो, लेकिन हिंदी भाषा बड़ी ताकत बनकर उभरी है। मैं आज भी हिंदी में ही अपने विचारों को ज्यादा आसानी से रख पाता हूं।
हिंदी में ब्लॉगिंग करना रहा फायदेमंद : पार्थ गुसांई, दीक्षांत बिष्ट
ट्रेवल ब्लॉगर पार्थ गुसांई और दीक्षांत बिष्ट की यू-ट्यूब पर अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। वह हिंदी में बनाए ब्लॉग के जरिए खुद की पहचान बनाने के साथ ही राज्य की खूबसूरती से लोगों को रूबरू करा रहे हैं। बतौर पार्थ और दीक्षांत हम हिंदी में ही अपने ब्लॉग बनाते हैं, क्योंकि हमारे ज्यादा दर्शक हिंदी के है। कहते हैं कि युवा वर्ग अलग-अलग जगहों पर जाना पसंद करता है। अच्छी जगहों की तलाश के लिए वह सोशल मीडिया से ही जानकारी जुटाता है। इस बीच हमने देखा कि हमारे हिंदी में बनाए गए ब्लॉग को अंग्रेजी में बनाए ब्लॉग की तुलना में ज्यादा पसंद किया गया। इसके बाद से हमने हिंदी में ब्लॉगिंग शुरू की।