कपड़ों से भरे तीन थैले लेकर दून आया हूं। जब जाउंगा तो यही तीन थैले साथ होंगे। जाने के दौरान खुद अपना ऑडिट करवाउंगा। भ्रष्टाचार का एक भी आरोप न मुझ पर कभी लगा और न मैं कभी लगने दूंगा। इसलिए यहां बैठे अधिकारी सुन लें। अगर ईमानदारी से काम करेंगे तो मैं हर समय साथ रहूंगा। लेकिन भ्रष्टाचार में गोता लगाया तो फिर मैं बख्शूंगा नहीं।
यह दो टूक बात शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आईएसबीटी परिसर में स्थित विकास कार्यों के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने अधिकारियों को चुस्त रहने की नसीहत दी तो पुलिस पर तंज कसे। उन्होंने कहा अधिकारियों को अब चुस्त रहना होगा।
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उन्होंने कहा जब तक केदारनाथ आपदा से प्रभावित एक-एक व्यक्ति का पुनर्वास न हो जाए। तब तक वह मुख्यमंत्री आवास में नहीं रहेंगे। वह जिस गेस्ट हाउस में फिलहाल रह रहे हैं उसी में उनका निवास होगा।
आरटीआई के इस्तेमाल करने को कहा
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आरटीआई एक्ट लेकर आई। इस एक्ट के कारण न तो ‘हरीश’ को चैन की नींद आती है और न ही ‘पुरुषोत्तम’ को। इसलिए आप सभी को सूचना का अधिकार का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए। ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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उन्होंने कहा केंद्र खाद्य सुरक्षा अधिनियम, शिक्षा का अधिकार और रोजगार के अधिकार के बाद अब सड़क किनारे बैठे लोगों के लिए अधिकार ला रही है। इससे खोमचे, फल और ठेली लगाने वाले व्यापारी को अधिकार मिल जाएगा।
पुलिस वालों की ली चुटकी
मुख्यमंत्री ने यह बात बोल कर पुलिस अधिकारियों की तरफ देखा और चुटकी ली ‘हालांकि इससे पुलिस कर्मियों को बड़ी, दिक्कत होगी’।
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उसके बाद कई देर तक वहां पर लोग ठहाके लगते रहे और पुलिस अधिकारी एक दूसरे का मुंह ताकने।
लोकसभा के लिए की अपील
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जाते जाते जनता से आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दुबारा लाने की अपील भी कर डाली। वह बोले कि आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया है। अब इज्जत आपके हाथों में है।
फिर वह हंसते हुए बोले कि झाड़ में आप लोगों ने चढ़ा तो दिया है, अब नीचे मत गिराना। उसके बाद फिर से वहां पर ठहाके लगने लगे।
अब एमडीडीए को एक हफ्ते का वक्त
नगर निगम को शहर की सफाई व्यवस्था दुरस्त करने के लिए मुख्यमंत्री रावत ने एक हफ्ते का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर एक हफ्ते में शहर साफ नहीं हुआ तो वह खुद झाडू लेकर शहर की सड़कों पर उतर जाएंगे। फिर बेइज्जती किसकी होगी यह अधिकारी जान लें। यह फार्मूला सफल रहा।
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शहर का नब्बे फीसदी इलाका साफ हो गया। यह बात शायद मुख्यमंत्री को भी पता है। तभी तो उन्होंने कार्यक्रम में इस बार एमडीडीए को एक हफ्ते की मोहलत दी है।
उन्होंने कहा शहर की जितनी भी मलिन बस्ती है। उसमें मूलभूत सुविधा एमडीडीए एक हफ्ते में जुटाए। एक हफ्ते बाद वह खुद इन बस्तियों का दौरा करेंगे। अगर कहीं कोई शिकायत आई तो फिर बेइज्जती किसकी होगी यह अधिकारी जान ले।
वीसी साहब, मेरे ऑफिस के बाहर की नाली बनवा देना
एमडीडीए के वीसी साहब, माजरा में मेरे ऑफिस के बाहर नाली का काम करवा देना। नहीं तो लोग बोलेंगे कि यह मुख्यमंत्री बोलता कुछ है और होता कुछ है। इज्जत रख लेना। इस पर वहां पर ठहाके लग गए।
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उन्होंने आगे कहा सरकार की प्राथमिकता देहरादून को विश्व स्तर पर लाना है। इसलिए यहां की सफाई, ड्रेनेज और अन्य विकास कार्यों पर पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा जल्द ही रिस्पना, बिंदाल और सुसवा के लिए योजना आएगी। योजना के तहत इन नदियों में बाढ़ से नुकसान नहीं होगा।