कांग्रेस आलाकमान ने उत्तराखंड के नेताओं को स्पष्ट कह दिया है कि जल्द उम्मीदवारों का नाम बताएं ताकि उनकी सूची की घोषणा की जा सके।
मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य दिल्ली में ही डेरा डाले हैं लेकिन टिहरी और पौड़ी में पेंच अब भी फंसा है। मुख्यमंत्री रविवार को एक जनसभा को संबोधित करने के लिए कुमाऊं आए पर वापस दिल्ली लौट गए।
हरीश रावत के संसदीय क्षेत्र हरिद्वार से एक नाम पर राय बन गई थी लेकिन अब तय हो गया है कि मुख्यमंत्री अपनी सीट पर पत्नी रेणुका रावत को ही लड़ाएंगे।
सोनिया के सामने बहुगुणा ने खड़े किए हाथ
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शनिवार को सोनिया गांधी से मिलकर चुनाव लड़ने में असमर्थता जताई है। उन्होंने अपनी मंशा एक बार फिर मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी बता दी है।
अभी तक परिवार के किसी भी सदस्य के चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे बहुगुणा अब बेटे साकेत को लड़वाने को तैयार हैं।
मुख्यमंत्री के दिल्ली स्थित आवास पर इन दिनों बैठकों का दौर जारी है, लेकिन नेताओं के अड़ियल रुख और उनकी शर्तों ने मुश्किलें बढ़ा दी है।
चुनाव ही लड़ने को तैयार नहीं कोई
दरअसल कांग्रेस को उम्मीदवार चुनने में दिक्कत नहीं आ रही है बल्कि जिनको पार्टी लड़ाना चाह रही है, वह पीछे हट रहे हैं। दूसरी ओर पार्टी के कई नेता चुनाव लड़ने को तैयार बैठे हैं लेकिन उन्हें पैनल में ही शामिल नहीं किया गया है।
पौड़ी संसदीय सीट का पेंच अभी फंसा हुआ है। पहले सतपाल महाराज, फिर हरक सिंह रावत और अब मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने भी चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। पार्टी यहां से रिटायर ले. जनरल गंभीर सिंह नेगी को उम्मीदवार बना सकती है।
नेगी 2008 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। पार्टी ने इनका इस्तेमाल चुनाव में फौजियों के बीच प्रचार में किया है। हालांकि पार्टी में निचले स्तर पर नेगी की उम्मीदवारी को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं है।
नैनीताल से वर्तमान सांसद केसी सिंह बाबा और अल्मोड़ा से वर्तमान सांसद प्रदीप टम्टा के नाम घोषित होने हैं।