2009 के लोकसभा चुनाव से तुलना की जाए तो पहाड़ में मतदाता धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। हाल यह है कि मैदान में पहाड़ के मुकाबले मतदाताओं के बढ़ने की रफ्तार दोगुनी है।
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प्रदेश में कालाढुंगी में वोटर बनने की रफ्तार करीब 32 प्रतिशत है जबकि राजपुर में प्रदेश में सबसे कम वृद्धि दर है। राजपुर में 2009 के मुकाबले केवल 1.1 प्रतिशत वोटरों की संख्या में इजाफा हुआ है।
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उत्तरकाशी जिले को अपवाद मान लिया जाए तो पहाड़ में पहले से ही वोटर टर्नआउट कम है। इस पर वोटरों की संख्या बढ़ने की रफ्तार मैदान के मुकाबले पहाड़ में बहुत कम है।
उत्तराखंड में दो सीटें पर्वतीय
प्रदेश में पांच संसदीय क्षेत्रों में से विशुद्ध रूप से दो पर्वतीय सीटें हैं। ऐसी ही एक सीट अल्मोड़ा में 2009 की तुलना में वोटरों की संख्या में करीब 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
इसी तरह गढ़वाल संसदीय सीट में वोटरों की संख्या बढ़ने का प्रतिशत करीब दस प्रतिशत है। दूसरी ओर मैदानी सीटों का हिसाब देखा जाए तो मतदाता यहां पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में करीब दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं।
हरिद्वार संसदीय सीट पर 2009 की तुलना में वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत है। यही हाल नैनीताल सीट का भी है। नैनीताल सीट करीब साठ प्रतिशत मैदानी है और यहां भी प्रतिशत वृद्धि दर करीब 19 प्रतिशत है।
मैदानी इलाकों पर नेताओं का फोकस ज्यादा
पहाड़ और मैदान का यह अंतर टिहरी संसदीय सीट पर बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। टिहरी की पर्वतीय विधानसभाओं में वृद्धि दर दस से भी कम है।
दूसरी ओर मैदानी विधानसभाओं में वृद्धि दर पर्वतीय क्षेत्रों के मुकाबले दोगुनी से अधिक है। इसका फर्क इस सीट पर भी देखा जा सकता है।
टिहरी में अब नेताओं का फोकस मैदानी क्षेत्रों पर अधिक रहता है। मान लिया गया है कि देहरादून से बढ़त बनाने वाले को इस सीट पर शर्तिया तौर पर जीत हासिल होगी।
हालांकि परिसीमन में इस बात का ध्यान रखा गया था कि पर्वतीय क्षेत्रों को वेटेज देकर बैलेंस करने की कोशिश की जाए।
अगले परिसीमन से बदल जाएगी तस्वीर
पर्वतीय जिलों में मतदाताओं की संख्या कम होने का एक और नुकसान है। पर्वतीय जिलों में मतदाता कम होने से क्षेत्रफल अधिक हो जा रहा है। रफ्तार यही रही तो अगले परिसीमन में इन सीटों की प्रकृति भी पूरी तरह से बदल जाएगी।
2009 की तुलना में सीटों की प्रतिशत वृद्धि दर
टिहरी संसदीय क्षेत्र-10.81गढ़वाल संसदीय क्षेत्र-10.27नैनीताल संसदीय क्षेत्र-19.75हरिद्वार संसदीय सीट-20.01अल्मोड़ा संसदीय सीट-14.02
पहाड़ पर विशेष फोकस की जरूरत
विशेषज्ञों के मुताबिक पर्वतीय जिलों में मतदाताओं की वृद्धि दर कम होने के कई कारण हैं। अर्थशास्त्री आदित्य गौतम के मुताबिक पर्वतीय जिलों में दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर कम होती जा रही है। इसका फर्क मतदाताओं की वृद्धि दर पर भी पड़ रहा है। दूसरा बड़ा कारण पलायन भी है।
जनगणना 2011 में ही प्रदेश में करीब तीन लाख घर खाली पाए गए थे। करीब-करीब हर जगह वोटरों की संख्या में वृद्धि का एक बड़ा कारण नए मतदाता भी हैं। पर पलायन के कारण यह आबादी पहाड़ की बजाय मैदान में दर्ज हो रही है। पहाड़ के मतदाताओं पर विशेष फोकस भी होना चाहिए।
उधर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का कहना है कि मतदाताओं को जागरूक करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। मतदाताओं के पहचान पत्र बनाने के विशेष अभियान भी चलाए गए।