उत्तराखंड में सरकार को सहयोग कर रही बहुजन समाज पार्टी से अपने रिश्तों को लेकर केंद्रीय मंत्री हरीश रावत खुद को बदलने को तैयार हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं जो कुछ भी किया पार्टी के हित में किया। अगर बीएसपी को कुछ नाराजगी है तो अपने को सुधारने की कोशिश करेंगे।
तमाम सवाल छोड़ गए हरीश रावत
केंद्रीय मंत्री हरीश रावत एक बार फिर देहरादून आकर इशारों-इशारों में कई सवाल छोड़ गए हैं। कांग्रेस के विधायक उनके विरोध में आलाकमान को पत्र भेज रहे हैं इस पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
उनके इस बयान ने कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के दोनों पदों पर कोई वैकेन्सी नहीं है सवाल खड़े करता है। सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उनका नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष ने दो महीने पहले इस्तीफा सौंप रखा है।
ये कर रहे रावत का विरोध
मुख्यमंत्री के विकल्प के तौर पर हरीश रावत का नाम आने के बाद सबसे पहला विरोध सरकार चला रहे सहयोगी दल पीडीएफ की ओर से था। मंत्री प्रसाद नैथानी ने बाकयदा अंबिका सोनी से बात कर अपनी राय साफ कर दी थी।
वहीं हरीश रावत के संसदीय क्षेत्र हरिद्वार से जीतकर आए बसपा के तीन विधायक भी हरीश रावत का नाम आने पर विरोध में खड़े हैं। कभी हरीश रावत खेमे में 17 विधायक गिने जाते थे। आलाकमान को भेजे गए पत्रों में कुछ नाम उनमें से भी शामिल हैं।
बसपा से रिश्ते सुधारने की बात
हरीश रावत वर्तमान में बह रही राजनीतिक हवा और नब्ज को बखूबी समझते हैं ऐसे में मंगलवार को उन्होंने बसपा से अपने रिश्ते सुधारने की बात खुलकर कही।
साथ ही इस समय नेतृत्व परिवर्तन व संगठन में वैकेन्सी न होने की बात कह ताजा विवाद से अपने को दूर करने की कोशिश की है।
खुद को बताया सेवक
उन्होंने कहा कि आपदा के कारण जो भी सरकार व संगठन में आंतरिक सवाल थे, वह समाप्त हो गए हैं। क्या विवाद हो रहा है मैं इसकी चर्चा नहीं करना चाहता प्रदेश में मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष को सभी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
खुद को पार्टी में चपरासी बता एक सिपाही केनाते पार्टी में दी जाने वाली कोई भी जिम्मेदारी संभालने की बात फिर दोहराई है।