प्रदेश के मुद्दों पर इन दिनों माननीय विधानसभा सत्र में गर्मागर्म बहस से जूझ रहे हैं। 21 जनवरी को सदन का सत्र तो संपन्न हो जाएगा लेकिन इस बार 26 जनवरी को बच्चों की विधानसभा बैठेगी।
प्रदेश में पहली बार बाल विधानसभा का आयोजन में बच्चों की सरकार के बीच जमकर तकरार होगी। बच्चे सत्ता की चमक-दमक की सच्चाइयों से भी रूबरू होंगे।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण की पहल
गणतंत्र दिवस के मौके पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से बाल विधानसभा अस्थाई राजधानी देहरादून के एश्ले हॉल स्थित स्कॉलर्स होम स्कूल में आयोजित होने जा रही है।
इसमें प्रदेश भर के 72 बच्चों को विधायक बनाया जाएगा। इनमें से ही चार बच्चों से जुड़े विभागों समाज कल्याण, शिक्षा, श्रम और गृह विभाग के चार मंत्री बनाए जाएंगे। कोई एक बच्चा मुख्यमंत्री और एक विधानसभा अध्यक्ष बनेगा।
बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता
विधानसभा में बच्चों से जुड़े सभी मुद्दों और समस्याओं पर पक्ष व विपक्ष गर्मागर्म बहस करेगा। सत्र के बहाने बच्चों को बाल अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।
बच्चों से जुड़े विभागों में सरकारों की असफलता के साथ ही भावी योजनाओं और जरूरी कदम उठाने पर भी चर्चा होगी।
इनका है कहना
बाल विधानसभा के बहाने सभी बच्चों में उनके अधिकारों के प्रति जागरुकता आएगी। इसके अलावा आयोग के सुझाव पर प्रदेश के सभी विद्यालयों में गणतंत्र दिवस पर प्रभात फेरियां निकाली जाएंगी। इसमें बच्चे बाल अधिकारों के लिए कदमताल करेंगे। बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई जा रही हैं।
-अजय सेतिया, अध्यक्ष, बाल आयोग