केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत उत्तराखंड के सीएम बनने से पहले हरिद्वार के सांसद थे। सबसे मेलजोल, सर्वसाधारण के लिए उपलब्धता और संगठन के छोटे स्तर के कार्यकर्ता से भी नजदीकी पहचान उनकी खास सियासी पूंजी है।
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वह उत्तराखंड के उन चंद सियासी नेताओं में हैं जिनकी पहचान जमीन से जुड़ी है। कभी सपा का गढ़ रहे हरिद्वार के मैदानी इलाके से सियासी मोर्चा मारकर उन्होंने पहाड़-मैदान का फर्क मिटा दिया था। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी अपने क्षेत्र के वोटर के लिए उन्हें एक पटवारी तक को फोन करने में गुरेज नहीं।
संजीदगी के साथ बेहद हाजिरजवाब भी हैं। संकट की स्थिति में गांधी परिवार और यूपीए सरकार का भी जब-तब बचाव करते आए हैं। मुख्यमंत्री की कुरसी दो बार बड़ी नजदीक से खिसक गई थी। तीसरी बार उन्हें कामयाबी मिल रही है। उनकी ताजपोशी की खबर से जिले का हर आमो-खास खुश है।
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संघर्ष के दिनों में साथ छोड़ गए थे दो ‘करीबी’
हरीश रावत वर्ष 2012 में सीएम बनते-बनते रह गए थे। सीएम के इस संघर्ष में उनके दो खास विधायक साथ छोड़ गए थे। जिले के यह दोनों विधायक पाला बदलकर विजय बहुगुणा खेमे में जा बैठे थे। अब फिर से समीकरण बदले हैं तो यह दोनों विधायक असहज महसूस कर रहे हैं।
2012 के विधानसभा चुनाव में जिले में कांग्रेस के तीन विधायक चुनकर आए थे। इनमें से दो विधायकों को हरीश रावत का खासमखास माना जाता था। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने विजय बहुगुणा को प्रदेश की कमान सौंपी तो हरीश रावत नाराज हो गए थे।
रावत अपने समर्थक विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंच गए थे। दिल्ली में कश्मकश चल रही थी कि वहां से एक विधायक चुपके से निकलकर विजय बहुगुणा को बधाई देने देहरादून पहुंच गए थे। बाद में एक और विधायक बहुगुणा खेमे में जा पहुंचे थे।
हरीश रावत समर्थकों ने मनाई खुशियां
हरीश रावत के समर्थकों ने उनकी ताजपोशी की खबर पर खुशियां मनाई। हरीश रावत के इलाके में एक दिन पहले आतिशबाजी करने के बाद कार्यकर्ता धूम-धड़ाके करते रहे।
मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्री हरीश रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद जग गई है। हरीश रावत के सीएम बनने के साथ हरिद्वार में एनडीआरएफ, गन्ना अनुसंधान केंद्र और पुष्प अनुसंधान केंद्र आदि की राह आसान हो जाएगी। इन प्रोजेक्ट के लिए पहले राज्य सरकार ने जमीन नहीं दी और बाद में जमीन मिली तो उस पर विवाद खड़ा हो गया।
केंद्र में मंत्री रहते हुए हरीश रावत ने हरिद्वार के लिए कई योजनाएं स्वीकृत कराई। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा को देखते हुए रावत यहां के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की बटालियन स्वीकृत करा कर लाए थे। जमीन के लिए राज्य सरकार के पास प्रस्ताव गया।
भाजपा को भी मिल गया खुशी मनाने का मौका
हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने से जहां उनके समर्थक खुश हैं, वहीं चिर प्रतिद्वंद्वी भाजपा के नेताओं को भी खुश होने का मौका मिला है।
लोकसभा चुनाव में हरिद्वार सीट से हरीश रावत के मैदान में नहीं होने से भाजपा मुकाबले को आसान मान रही है। हालांकि खुलकर भाजपा नेता यह स्वीकार नहीं कर रहे लेकिन संभावित प्रत्याशियों के मन में लड्डू जरूर फूट रहे हैं।
वर्ष 2009 में हरिद्वार लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़े हरीश रावत ने भाजपा के प्रत्याशी स्वामी यतींद्रानंद को हराया था। सांसद बनने के बाद से हरीश रावत हरिद्वार में लगातार सक्रियता बनाए हुए हैं।
जनता के बीच उपलब्धता उनकी सबसे बड़ी खासियत है। दो साल से रावत की दावेदारी मुख्यमंत्री पद को लेकर थी।
हरीश रावत संघर्षशील नेता हैं। उन्हें प्रदेश की समस्याओं की जानकारी है। हरिद्वार की तो रग-रग से वाकिफ हैं। उनके सीएम बनने से हरिद्वार के साथ ही पूरे प्रदेश का विकास होगा। - ओपी चौहान, अध्यक्ष महानगर कांग्रेस कमेटी हरिद्वार।
- हरीश रावत जमीन से जुड़े नेता हैं। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर वह हर क्षेत्र का विकास करेंगे। उनके सीएम बनने की घोषणा से सभी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। - कैलाश शर्मा, प्रवक्ता, महानगर कांग्रेस कमेटी हरिद्वार।
कांग्रेस सरकार के दो साल कुर्सी हिलाने और कुर्सी बचाने में बीत गए। लेकिन कुर्सी पर चेहरा बदलने से कुछ नहीं होगा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश की पांचों सीटें हार रही है। हरिद्वार में कांग्रेस प्रत्याशी कोई रहे, उसकी बुरी गत होने वाली है। - नरेश बंसल, प्रदेश महामंत्री भाजपा।
- लोकसभा चुनाव में हरिद्वार सीट पर भाजपा की जीत पक्की है। यहां से सांसद चुने गए हरीश रावत सीएम बनने जा रहे हैं तो कांग्रेस के पास यहां चुनाव लड़ाने को प्रत्याशी तक नहीं बचा है। हालांकि रावत भी चुनाव लड़ लें तो हारना उन्हें भी पड़ेगा। - स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा विधायक, हरिद्वार ग्रामीण।