किस्मत ने इस बार हरीश रावत का साथ दिया और आखिरकार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी उनकी हो गई। दिल्ली से विरोध का झंडा उठाकर देहरादून पहुंचे सांसद सतपाल महाराज ने विधानमंडल दल की बैठक के दौरान जमकर हंगामा काटा।
पढ़ें, CM बनने के बाद रावत के सामने हैं चार चुनौती
उन्होंने पर्यवेक्षकों के आगे अपने इस्तीफे तक की पेशकश कर डाली। उनके समर्थन में उनकी पत्नी मंत्री अमृता रावत समेत चार विधायक भी उठ खड़े हुए। एक बजे बैठक शुरू हुई और पांच बजे हरीश के नाम का ऐलान हो सका।
परंपराओं की दुहाई देकर मामला हुआ शांत
बैठक में 22 विधायकों की राय न लिए जाने और फैसले के पहले ही प्रदेश भर में हरीश रावत के बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगा उन्हें मुख्यमंत्री पद की बधाई देने का मामला पर्यवेक्षकों की हवाइयां उड़ाने वाला था।
पढ़ें, हरीश रावत बने उत्तराखंड के नए सीएम
कांग्रेस आलाकमान ने नेतृत्व परिवर्तन की जो स्क्रिप्ट लिखकर भेजी थी, वैसा हुआ नहीं। दिल्ली से आए पर्यवेक्षक जनार्दन द्विवेदी, गुलाम नबी आजाद और प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने बार-बार कांग्रेस की परंपराओं और नेतृत्व के फैसले की दुहाई देकर मामला शांत कराया।
पढ़ें, रावत जी! सपनों का सौदागर नहीं बाजीगर बनना होगा
अंदर का नजारा पलभर में तस्वीर बदल सकता था। इन सबके बीच शाम पांच बजे हरीश रावत के नाम की घोषणा हो सकी।
'आप बनाएंगे मुख्यमंत्री'
बैठक सुबह साढ़े 11 बजे शुरू होनी थी लेकिन तब तक हरीश रावत समर्थक आठ विधायक ही सभा कक्ष में मौजूद थे। बीजापुर गेस्ट हाउस के बाहर सतपाल महाराज आए और मीडिया पर भड़क गए।
पढ़ें, रावत जी! सपनों का सौदागर नहीं बाजीगर बनना होगा
तल्खी से पूछा-आप बनाएंगे मुख्यमंत्री। सोनिया गांधी बनाएंगी और मैंने हरीश रावत को आशीर्वाद नहीं दिया है। उनके इस रुख ने साफ कर दिया था कि बैठक में हंगामा तय है। इंदिरा हृदयेश साढ़े बारह बजे पहुंची।
पढ़ें, उत्तराखंड के नए सीएम के बारे में जानिए सबकुछ
फिर सतपाल महाराज अंदर पर्यवेक्षकों से मिले। 12.45 बजे अमृता रावत समर्थक विधायकों के साथ पहुंची। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समय पर अध्यक्ष यशपाल आर्य के साथ पहुंच गए थे। एक बजे बैठक शुरू हुई। सबसे देर से कक्ष में पहुंचने वाले विधायक नवप्रभात थे।
...तो हमें क्यों बुलाया गया
बैठक में विजय बहुगुणा की ओर से एक लाइन का प्रस्ताव आना था कि विधानमंडल दल आपसे अनुरोध करता है कि नेता के नाम का चयन करें।
पढ़ें, CM बनने के बाद रावत के सामने हैं चार चुनौती
इससे पहले अमृता रावत भड़क पड़ी और एक कार्ड दिखाते हुए कहा कि हमें नेता के चयन के बुलाया गया है और हरीश रावत के बतौर मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में बैनर-पोस्टर, होर्डिंग्स लगे हैं। कार्ड बांटे जा रहे हैं। पर्यवेक्षकों ने मामला शांत कराना चाहा। लेकिन अमृता अड़ी रहीं।
पढ़ें, हरीश रावत बने उत्तराखंड के नए सीएम
कहा कि जब सब तय है तो हमें क्यों बुलाया गया। अंबिका सोनी ने होर्डिंग-पोस्टर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह तरीका गलत है। मामला किसी तरह शांत हुआ।
उठा हस्ताक्षर का मसला
बैठक में प्रस्ताव आता, इससे पहले 22 विधायकों के हस्ताक्षर का मामला उठ गया। विधायक जीतराम ने कहा कि हमने काफी पहले आलाकमान को पत्र भेजकर कहा था कि नेता चयन से पहले हमारी राय ली जाए। लेकिन अचानक फैसला कर दिया गया।
हरक सिंह रावत ने बहुगुणा सरकार के कामकाज का बखान किया, जबकि इंदिरा हृदयेश चुपचाप तमाशा देखती रहीं। जैसे तैसे नए नेता के चयन का नाम तय करने का प्रस्ताव पारित कर फैसला सोनिया गांधी पर छोड़ दिया गया। इसी बीच विधायक अंदर ही बैठे रहे।
...तो मैं इस्तीफा देता हूं
पर्यवेक्षक बाहर निकले और आलाकमान से बात हुई। पास के कमरे में इंतजार कर रहे हरीश रावत करीब ढाई बजे विधायकों के बीच पहुंचे। उम्मीद थी कि बस अब बाहर निकलते ही घोषणा हो जाएगी। विधानमंडल दल की बैठक समाप्त हो चुकी थी।
पढ़ें, हरीश रावत बने उत्तराखंड के नए सीएम
इसलिए हरीश रावत के साथ सतपाल महाराज भी अंदर पहुंच गए। फिर क्या महाराज ने शुरू कर दी गरमागरम बहस। उन्होंने कहा कि विधायकों की राय तक नहीं ली जा रही है। मेरे पास भी विधायकों का समर्थन है।
पढ़ें, रावत जी! सपनों का सौदागर नहीं बाजीगर बनना होगा
पार्टी एक व्यक्ति को केंद्रीय मंत्री भी बनाती है फिर मुख्यमंत्री बना रही है। मैं सालों से पार्टी की सेवा कर रहा हूं। मेरे सम्मान की पार्टी को चिंता नहीं है तो मैं इस्तीफा दे देता हूं।
पढ़ें, उत्तराखंड के नए सीएम के बारे में जानिए सबकुछ
इतना कहकर महाराज उठे और बाहर जाने लगे तभी उन्हें पकड़कर बैठाया गया। इसी बीच उनके समर्थन में चार विधायक अमृता रावत, राजेंद्र भंडारी, जीतराम और अनुसुइया प्रसाद मैखुरी खड़े हो गए। सभी को शांत कराया गया।
सीएम से बड़ा है आपका कद
बीच बचाव की मुद्रा में जर्नादन द्विवेदी ने महाराज से कहा कि आपके तो देश-विदेश में चेले हैं आप का अलग स्थान है आपका कद मुख्यमंत्री से बहुत बड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी नाराज विधायकों को शांत कराया।
पढ़ें, CM बनने के बाद रावत के सामने हैं चार चुनौती
बोले, मुझे भी तो बिना किसी आरोप के हटा दिया गया है। अमृता रावत हरीश रावत की ओर इशारा कर बोलीं कि ये हमें आपस में लड़ाते हैं। उन्होंने पक्षपात और विरोधियों को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। हरीश रावत मौके की नजाकत देख पहले चुपचाप बैठे सुनते रहे, फिर सबको साथ लेकर चलने की बात कही।